न्यूजस्टिच। दिल्ली
अगर आप यह सोचते हैं कि आपका पैसा बैंक खातों में पूरी तरह सुरक्षित है, तो आपको अपनी यह सोच तुरंत बदलनी होगी। भारत सरकार की हालिया Digital Threat Report ने ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों भारतीयों की चिंता बढ़ा दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, साइबर अपराधी अब आम लोगों को ठगने के लिए Artificial Intelligence (AI) का खतरनाक इस्तेमाल कर रहे हैं।
4 सालों में दोगुने से ज्यादा हुए साइबर हमले
CERT-In, CSIRT-Fin और SISA द्वारा संयुक्त रूप से जारी इस रिपोर्ट के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। देश में जहां साल 2021 में करीब 14 लाख साइबर हमले दर्ज किए गए थे, वहीं साल 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 29 लाख से भी पार हो गया है। इन हमलों का सबसे बड़ा और आसान निशाना हमारा बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर बन चुका है।
इंसानों की जगह अब ‘AI’ खुद कर रहा है हैकिंग
रिपोर्ट का सबसे डरावना खुलासा यह है कि अब हैकर्स को खुद कोडिंग करने की जरूरत नहीं पड़ रही है, बल्कि AI खुद साइबर हमले डिजाइन और एक्जीक्यूट कर रहा है। रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: नवंबर 2025 में देश में एक ऐसा पहला साइबर जासूसी अभियान पकड़ा गया, जिसमें 80 से 90 फीसदी काम पूरी तरह से AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा किया गया था। AI महज कुछ मिनटों में किसी भी बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियां ढूंढ़ निकालता है।
इन 3 डिजिटल सेवाओं पर सबसे बड़ा खतरा
हैकर अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा खतरा इन चीजों पर मंडरा रहा है। UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस): गलत QR कोड और फर्जी पेमेंट रिक्वेस्ट। मोबाइल बैंकिंग ऐप्स: फर्जी क्लोन ऐप्स के जरिए डेटा चोरी। वीडियो KYC (Know Your Customer): डीपफेक वीडियो और वॉइस क्लोनिंग के जरिए फर्जी डिजिटल पहचान बनाना।
263 दिनों का खतरनाक गैप
रिपोर्ट में बताया गया है कि औसतन किसी भी बैंक या सिस्टम से डेटा चोरी होने का पता चलने में 263 दिन लग जाते हैं। यानी हैकर्स महीनों तक आपके डेटा का गलत इस्तेमाल करते रहते हैं और बैंकों को भनक तक नहीं लगती। सिर्फ ऑडिट काफी नहीं, अब सतर्कता ही सुरक्षा है। सरकारी रिपोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि बैंकों के लिए अब सिर्फ सालाना सिक्योरिटी ऑडिट कराना काफी नहीं है। इसके लिए लगातार 24×7 निगरानी और एआई-बेस्ड मजबूत सुरक्षा तंत्र की जरूरत है। यह साइबर खतरा अब सिर्फ बैंकों का सिरदर्द नहीं है, बल्कि डिजिटल बैंकिंग इस्तेमाल करने वाले हर आम नागरिक की व्यक्तिगत समस्या बन चुका है।

