बिहार के बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह एक बार फिर बड़ी कानूनी मुसीबत में फंसते नजर आ रहे हैं। मामला गोपालगंज के मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमराव गांव का है, जहां एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होना अब विधायक समेत कई लोगों के लिए गले की फांस बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए दो वीडियो ने न केवल पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है, बल्कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
बीती 2 और 3 मई को सेमराव गांव में गुड्डू राय उर्फ अमरेश राय के आवास पर उपनयन संस्कार का आयोजन था। इस निजी कार्यक्रम में मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह और मशहूर भोजपुरी गायक गुंजन सिंह भी शिरकत करने पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान नर्तकियों का अश्लील डांस चल रहा था, लेकिन पुलिस की नजर उस वक्त ठिठक गई जब वीडियो में विधायक अनंत सिंह के ठीक पीछे एक व्यक्ति को हाथ में घातक ‘AK-पैटर्न’ का हथियार लिए बैठा देखा गया।
AK-56 का शक और पुलिसिया एक्शन
वीडियो में दिख रहा हथियार कोई साधारण बंदूक नहीं, बल्कि प्रतिबंधित ‘AK-56’ राइफल होने का संदेह जताया जा रहा है। वीडियो वायरल होते ही गोपालगंज एसपी विनय तिवारी ने इसे गंभीरता से लिया। उनके निर्देश पर साइबर थाना के एसआई नवीन कुमार ने मीरगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस एफआईआर में विधायक अनंत सिंह, गायक गुंजन सिंह और आयोजक गुड्डू राय समेत 9 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि कई अन्य अज्ञात भी आरोपी बनाए गए हैं।
बैलिस्टिक जांच से खुलेगा राज
इस मामले में पुलिस ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए सख्त रुख अख्तियार किया है। एसपी विनय तिवारी ने बताया कि वीडियो में दिख रहे हथियार की असलियत जानने के लिए उसे एफएसएल (FSL) की टीम के पास भेजा गया है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि पुलिस अब इस हथियार की बैलिस्टिक जांच कराएगी। यह जांच स्पष्ट करेगी कि क्या वह वास्तव में एक प्रतिबंधित सैन्य-ग्रेड राइफल थी।
नियमों की धज्जियां और कानूनी शिकंजा
पुलिस विज्ञप्ति के अनुसार, कार्यक्रम में न केवल अश्लील प्रदर्शन हुआ, बल्कि हथियारों को बिना किसी कवर के खुलेआम प्रदर्शित किया गया, जो शस्त्र अधिनियम और लाइसेंसिंग शर्तों का सीधा उल्लंघन है। फिलहाल, डिजिटल साक्ष्यों को पेनड्राइव और लैपटॉप में सुरक्षित कर लिया गया है। अब पूरी कार्रवाई बैलिस्टिक रिपोर्ट पर टिकी है, जिसके आते ही बाहुबली विधायक और उनके करीबियों पर कानून का डंडा चलना तय माना जा रहा है।

