बिहार के शहरी विकास और रियल एस्टेट के इतिहास में 03 जुलाई 2026 का दिन एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में पटना स्थित ‘संकल्प सभागार’ में राज्य के नगर विकास एवं आवास विभाग और हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (HUDCO) के बीच एक ऐतिहासिक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते के तहत बिहार में 12 अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने के लिए 1,00,000 करोड़ रुपये (एक लाख करोड़ रुपये) के दीर्घकालिक वित्तपोषण (Long-term Financing) की मंजूरी दी गई है। इस महा-योजना से पूर्णिया समेत बिहार के कई प्रमुख संभागों की सूरत हमेशा के लिए बदलने वाली है।
3 लाख एकड़ में फैलेगा ‘नया बिहार’, लाखों रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत राज्य में लगभग 3 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में इन विश्वस्तरीय टाउनशिपों का विकास किया जाएगा। इसमें बिहार सरकार हडको के माध्यम से ₹1 लाख करोड़ का निवेश कर रही है, जबकि ₹6 लाख करोड़ का अतिरिक्त निवेश बाहरी स्रोतों (Private & Institutional Investors) से आकर्षित किया जाएगा। कुल ₹7 लाख करोड़ का यह महा-निवेश बिहार में निर्माण, आईटी और रिटेल सेक्टर में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करेगा।
पूर्णिया और सीमांचल के किसानों के लिए क्यों जरूरी है ‘लैंड पूलिंग’ को समझना?
आमतौर पर जब भी कोई बड़ी सरकारी परियोजना आती है, तो किसानों में अपनी जमीन छिनने या कम मुआवजा मिलने का डर होता है। लेकिन इस बार बिहार सरकार ‘लैंड पूलिंग पॉलिसी’ (Land Pooling Policy) के तहत काम कर रही है, जो किसानों को नुकसान नहीं बल्कि सीधे तौर पर करोड़पति बनाने का मॉडल है।
क्या है लैंड पूलिंग (Land Pooling) और यह कैसे काम करती है?
- साझेदारी का मॉडल: इसमें सरकार आपकी जमीन का जबरन अधिग्रहण (Acquisition) नहीं करती। किसान और जमीन मालिक स्वेच्छा से अपनी जमीन का हिस्सा टाउनशिप के लिए पूल (एकत्रित) करते हैं।
- स्मार्ट री-डेवलपमेंट: सरकार उस पूरी एकत्रित जमीन पर चौड़ी सड़कें, पार्क, सीवरेज, बिजली, स्कूल और अस्पताल जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित करती है।
- विकसित प्लॉट की वापसी: बुनियादी ढांचा तैयार होने के बाद, कुल जमीन का एक निश्चित हिस्सा (विकसित और व्यावसायिक प्लॉट के रूप में) वापस मूल मालिक (किसान) को लौटा दिया जाता है।
- कीमतों में रिकॉर्ड उछाल: हालांकि किसान को पहले के मुकाबले आकार में थोड़ी कम जमीन वापस मिलती है, लेकिन आधुनिक सुविधाएं और कमर्शियल हब बनने के कारण उस छोटे विकसित प्लॉट की बाजार कीमत (Market Value) पुरानी पूरी कृषि भूमि से कई गुना अधिक हो जाती है।
मुआवजे पर मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि लैंड पूलिंग के साथ-साथ जो भी किसान नकद मुआवजे का विकल्प चुनकर आवेदन देंगे, उन्हें 30 दिनों के अंदर उनके बैंक खाते में भुगतान कर दिया जाएगा।
पूर्णिया और सीमांचल क्षेत्र पर इसका क्या असर होगा?
पूर्णिया पूर्वोत्तर बिहार का एक प्रमुख व्यापारिक और मेडिकल हब है। इस प्रकार की ग्रीनफील्ड टाउनशिप योजना से पूर्णिया और इसके आस-पास के इलाकों की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी:
- प्रॉपर्टी की वैल्यू में बंपर तेजी: पूर्णिया के बाहरी इलाकों में व्यवस्थित टाउनशिप बनने से ग्रामीण और अर्ध-शहरी जमीनों के दाम आसमान छुएंगे।
- स्थानीय युवाओं को रोजगार: ₹7 लाख करोड़ के इस भारी-भरकम निवेश से स्थानीय स्तर पर रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस सेक्टर में नौकरियों की बहार आएगी, जिससे पलायन रुकेगा।
- महानगरों जैसी सुविधाएं: पूर्णिया और सीमांचल के लोगों को अब उच्च स्तरीय शिक्षा और वर्ल्ड क्लास हेल्थकेयर के लिए दिल्ली या पटना भागने की जरूरत नहीं होगी। टाउनशिप के अंदर ही ये सब उपलब्ध कराया जाएगा।
बिहार सरकार इस योजना के जरिए राज्य में 35 प्रतिशत शहरीकरण (Urbanization) के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जो भविष्य के आधुनिक बिहार की नींव रखेगा।

