बिहार की सत्ता के गलियारों में सुरक्षा का ‘घेरा’ केवल जान की हिफाजत नहीं, बल्कि रसूख की चमक भी तय करता है। बिहार सरकार के गृह विभाग (विशेष शाखा) ने सुरक्षा समिति की 17 अप्रैल 2026 की बैठक के बाद एक ऐसा आदेश जारी किया है, जिसने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। इस नए आदेश में जहाँ भाजपा के दिग्गज नेता विजय सिन्हा का कद सुरक्षा के लिहाज से ‘डाउनग्रेड’ हुआ है, वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबियों पर सरकार मेहरबान दिखी है।
विजय सिन्हा का ‘सुरक्षा कवच’ हुआ छोटा
बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के लिए यह खबर चौंकाने वाली है। अब तक वे ‘Z+’ श्रेणी की अभेद्य सुरक्षा में चलते थे, लेकिन नए आदेश के बाद उन्हें अब ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा से संतोष करना होगा। गृह विभाग ने प्रशासनिक और खतरे के आकलन (Threat Assessment) का हवाला देते हुए उनकी सुरक्षा श्रेणी को घटा दिया है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो विपक्ष के बड़े चेहरों की सुरक्षा में कटौती अक्सर चर्चा का विषय बनती है।

निशांत कुमार का बढ़ता रसूख: सीधे मिली Z श्रेणी
इस पूरे फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा जदयू नेता निशांत कुमार की हो रही है। उन्हें सीधे ‘Z’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। “नेता से माननीय” बनने के इस सफर में निशांत को मिली यह हाई-प्रोफाइल सुरक्षा स्पष्ट संकेत देती है कि सत्ता के केंद्र में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण और संवेदनशील हो चुकी है।
श्रवण कुमार का ‘एस्कॉर्ट’ पावर
मुख्यमंत्री के संकटमोचक और भरोसेमंद साथी श्रवण कुमार को भी सुरक्षा में ‘बूस्ट’ मिला है। उन्हें अब ‘Y+’ (With Escort) सुरक्षा दी गई है। यानी अब श्रवण कुमार के काफिले के साथ एस्कॉर्ट गाड़ियाँ भी साये की तरह मौजूद रहेंगी, जो उनके प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव की पुष्टि करता है।
| नेता का नाम | पुरानी श्रेणी | नई श्रेणी | स्थिति |
| विजय कुमार सिन्हा | Z+ | Z | डाउनग्रेड |
| निशांत कुमार | – | Z | नई सुरक्षा (अपग्रेड) |
| श्रवण कुमार | Y+ | Y+ (With Escort) | एस्कॉर्ट सुविधा जुड़ी |
सियासी मायने
बिहार में सुरक्षा श्रेणियों का यह बदलाव महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है। जानकारों का कहना है कि इसके जरिए मुख्यमंत्री ने अपनी कोर टीम को यह संदेश दिया है कि उनके करीबियों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है। वहीं, विजय सिन्हा की सुरक्षा में कटौती को भाजपा के खिलाफ एक ‘सांकेतिक कड़वाहट’ के रूप में देखा जा रहा है।
गृह विभाग के संयुक्त सचिव नवीन चन्द्र द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिए गए हैं कि नए प्रोटोकॉल के तहत जवानों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।

