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Delhi Liquor Case: एक-एक पैसे का हिसाब दो या जेल जाओ, दिल्ली शराब घोटाले पर सीएम रेखा गुप्ता सख्त, दिए ये आदेश

डेस्क। न्यूजस्टिच
दिल्ली में शराब की खुदरा बिक्री और उससे मिलने वाले राजस्व को लेकर मचे घमासान के बीच दिल्ली सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शराब बिक्री से जुड़े चार प्रमुख सरकारी उपक्रमों के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की व्यापक जांच (ऑडिट) के कड़े आदेश दिए हैं। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य शराब के कारोबार में पारदर्शिता लाना और राजस्व के एक-एक पैसे का हिसाब सुनिश्चित करना है।

राजस्व में बड़ी गड़बड़ी की आशंका
सरकार को मिले हालिया इनपुट और शुरुआती रिपोर्टों में यह बात सामने आई है कि दिल्ली में शराब की रिटेल बिक्री करने वाले कई संस्थानों में लंबे समय से खातों का सही तरीके से मिलान (Reconciliation) नहीं हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, बिक्री, खरीद और स्टॉक के आंकड़ों में विसंगतियां पाई गई हैं, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की प्रबल आशंका जताई जा रही है।

इन चार बड़े उपक्रमों पर गिरेगी गाज
दिल्ली में शराब की खुदरा बिक्री का जिम्मा मुख्य रूप से चार सरकारी संस्थानों के पास है:

DCCWS (दिल्ली कंज्यूमर कोऑपरेटिव होलसेल स्टोर)

DTTDC (दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम)

DSCSC (दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम)

DSIIDC (दिल्ली राज्य औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास निगम)

इन चारों उपक्रमों ने दिल्ली के विभिन्न इलाकों में अपने आउटलेट्स स्थापित किए हैं। अब इन सभी संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने कैश बैलेंस, स्टॉक रजिस्टर और खरीद-बिक्री के डेटा को आबकारी विभाग (Excise Department) के साथ साझा करें ताकि स्वतंत्र क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा-बख्शे नहीं जाएंगे दोषी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक धन के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर वित्तीय कुप्रबंधन, लापरवाही या जानबूझकर की गई अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि उन पर सख्त कानूनी मुकदमा भी चलाया जाएगा।

दो महीने की समय सीमा
दिल्ली सरकार ने इस पूरी जांच प्रक्रिया को समयबद्ध (Time-bound) रखने का फैसला लिया है। वित्त विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वह सभी डेटा का गहन विश्लेषण करे और दो महीने के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपे। इस ऑडिट प्रक्रिया के तहत आबकारी आयुक्त स्तर पर भी डेटा का स्वतंत्र रूप से वैलिडेशन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस ‘सर्जिकल ऑडिट’ से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि भविष्य के लिए एक जवाबदेह और पारदर्शी राजस्व प्रणाली भी विकसित होगी। दिल्ली की राजनीति में इस कदम को भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तौर पर देखा जा रहा है।

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