इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए भीषण हमलों के बाद अब दुनिया के सामने सबसे बड़ा डर ‘परमाणु तबाही’ का है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने शनिवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर सभी पक्षों से संयम बरतने की पुरजोर अपील की है।
IAEA की पैनी नज़र: “परमाणु सुरक्षा सबसे ऊपर”
IAEA ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि वह मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के घटनाक्रमों की बारीकी से निगरानी कर रही है। एजेंसी ने आगाह किया है कि युद्ध की इस स्थिति में परमाणु केंद्रों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे क्षेत्र के लाखों लोगों की जान को खतरा हो सकता है।
IAEA ने अपने बयान में कहा:
“एजेंसी मिडिल ईस्ट के हालातों पर लगातार नज़र बनाए हुए है। हम सभी देशों से संयम बरतने का आग्रह करते हैं ताकि क्षेत्र के लोगों के लिए परमाणु सुरक्षा का कोई जोखिम पैदा न हो।”
क्या लीक हुआ है रेडिएशन?
हमलों के बाद इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि ईरान के परमाणु केंद्रों (जैसे इस्फहान या बुशहर) को नुकसान पहुँचा हो सकता है। हालांकि, IAEA ने राहत भरी खबर देते हुए स्पष्ट किया है कि:
• एजेंसी इस क्षेत्र के सभी देशों के साथ लगातार संपर्क में है।
• अब तक किसी भी तरह के रेडियोलॉजिकल प्रभाव (रेडिएशन फैलने) के सबूत नहीं मिले हैं।
• सभी परमाणु केंद्र फिलहाल सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
क्यों डरी है दुनिया?
ईरान के पास कई संवेदनशील परमाणु ठिकाने हैं। अगर युद्ध के दौरान इनमें से किसी भी केंद्र पर मिसाइल गिरती है, तो यह केवल ईरान ही नहीं बल्कि पड़ोसी देशों के लिए भी विनाशकारी साबित हो सकता है। यही कारण है कि IAEA लगातार देशों को युद्ध के नियमों और परमाणु सुरक्षा प्रोटोकॉल की याद दिला रही है। एजेंसी ने अंत में कहा कि वह स्थिति की निगरानी करना जारी रखेगी और किसी भी नए घटनाक्रम की जानकारी दुनिया के साथ साझा करेगी।

