बिहार के मधेपुरा स्थित बीपी मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बीटेक की एक छात्रा की लाश हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटकी मिली। मृतका की पहचान मुजफ्फरपुर जिले के सकरा थाना क्षेत्र अंतर्गत मुरा हरलोचनपुर निवासी खुशबू कुमारी के रूप में हुई है। खुशबू की मौत के बाद जहां कॉलेज कैंपस में सन्नाटा पसरा है, वहीं मुजफ्फरपुर में उसके घर पर कोहराम मचा हुआ है। परिजनों ने कॉलेज प्रबंधन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या करार दिया है। साथ ही जांच की मांग भी की है।
रूममेट की एक कॉल और उजड़ गई खुशबू की दुनिया
मिली जानकारी के अनुसार, 2 फरवरी को खुशबू की रूममेट ने उसके पिता पवन सिंह को फोन कर सूचना दी कि उनकी बेटी ने फंदा लगा लिया है। बदहवास परिजन जब तक मधेपुरा पहुंचे, तब तक कॉलेज प्रशासन और पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। परिजनों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनके आने से पहले शव के साथ ‘छेड़छाड़’ क्यों की गई और कॉलेज प्रशासन ने उन्हें आधिकारिक तौर पर सूचित क्यों नहीं किया?
मेरी बेटी परेशान नहीं थी…पिता के उठे सवाल
मृतका के पिता पवन कुमार सिंह ने सिसकते हुए बताया कि उनकी बेटी बिल्कुल सामान्य थी। उन्होंने कहा कि रविवार को ही मेरी उससे आखिरी बार बात हुई थी, वह बहुत खुश थी। 27 जनवरी को ही वह घर से कॉलेज लौटी थी। उसने कभी भी कॉलेज या किसी परेशानी की शिकायत नहीं की। सितंबर 2024 में उसका एडमिशन हुआ था, वह अपने करियर को लेकर गंभीर थी। जो बेटी रविवार को हंसकर बात कर रही थी, वह सोमवार को जान कैसे दे सकती है?
परिजनों का आरोप, साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश!
खुशबू के चाचा साजन कुमार और अन्य परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बिना परिजनों की मौजूदगी के शव को फंदे से उतारना और आनन-फानन में पोस्टमार्टम के लिए भेजना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। परिजनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच हो, ताकि सच सामने आ सके कि खुशबू ने आत्मघाती कदम उठाया या उसे मौत के घाट उतारा गया है।
पटना के बाद अब मधेपुरा…हॉस्टल बने ‘डेथ जोन’?
अभी पटना के शंभू हॉस्टल में नीट छात्रा की मौत का घाव भरा भी नहीं था कि मधेपुरा की इस घटना ने हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन कर रही है, लेकिन कॉलेज प्रशासन की चुप्पी ने संदेह को और गहरा कर दिया है।
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