बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद से संभावित इस्तीफे की खबरों ने सूबे की सियासत में भूचाल ला दिया है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी तीर चलने शुरू हो गए हैं। राजद नेता तेजस्वी यादव द्वारा नीतीश कुमार के प्रति ‘सहानुभूति’ जताने वाले बयान पर अब भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कड़ा प्रहार किया है।
तेजस्वी का तंज: नीतीश जी को रहने नहीं दिया जाएगा
बीते दिनों तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “शुरू से ही हमारी सहानुभूति नीतीश जी के साथ रही है। हमने तो उनसे पहले ही कह दिया था कि आपको इस पद (मुख्यमंत्री) पर रहने नहीं दिया जाएगा। यह बात वह खुद भी अच्छी तरह जानते हैं।” तेजस्वी के इस बयान को भाजपा और जदयू के बीच सब कुछ ठीक न होने के संकेत के तौर पर देखा गया।
नकवी का पलटवार: नीतीश का अनुभव तेजस्वी की उम्र से ज्यादा
तेजस्वी यादव के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्तार अब्बास नकवी ने उन्हें अपनी हद में रहने की सलाह दी। नकवी ने तंज कसते हुए कहा:
“नीतीश कुमार का जितना लंबा राजनीतिक सफर रहा है, उतनी तो तेजस्वी यादव की उम्र भी नहीं है। मुझे लगता है कि नीतीश कुमार जैसे अनुभवी नेता को ज्ञान देने के बजाय तेजस्वी को खुद अपने ज्ञान को ठीक करने की जरूरत है।”
नकवी ने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार एक मंझे हुए राजनेता हैं और उनका कोई भी फैसला उनकी राजनीतिक दूरदर्शिता का हिस्सा होता है, न कि किसी के दबाव का।
सियासी समीकरण और 14 अप्रैल की तारीख
बिहार की राजनीति में यह बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है जब कयास लगाए जा रहे हैं कि 14 अप्रैल को नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद त्याग सकते हैं। भाजपा ने पहले ही शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया है, जो नए नेतृत्व के चयन में भूमिका निभाएंगे।
जहाँ तेजस्वी यादव इस बदलाव को नीतीश कुमार की ‘मजबूरी’ बताकर अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं भाजपा इसे एक रणनीतिक बदलाव करार दे रही है। फिलहाल, बिहार की जनता और राजनीतिक पंडितों की नजरें अब पटना की हलचल पर टिकी हैं, जहाँ हर बीतते घंटे के साथ समीकरण बदल रहे हैं।

