ईरान-इजराइल जंग के बीच ओमान पोर्ट पर मिसाइल हमला! नागौर के दलीप और बिहार के कैप्टन आशीष ने गवाई जान

डेस्क। न्यूजस्टिच
पश्चिम एशिया में जारी ईरान और इजराइल के बीच के भीषण संघर्ष की तपिश अब राजस्थान के नागौर तक पहुँच गई है। नागौर जिले के खींवताना गांव के निवासी दलीप सिंह, जो अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में एक क्रूड ऑयल कंपनी के जहाज पर अपनी सेवाएं दे रहे थे, इस युद्ध का शिकार हो गए हैं। ओमान पोर्ट के पास हुए एक भीषण मिसाइल हमले में दलीप की जान चली गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

ओमान पोर्ट पर ‘स्काईलाइट’ जहाज बना निशाना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा 1 मार्च की सुबह घटित हुआ। दलीप ‘Skylight’ कंपनी के एक विशाल क्रूड ऑयल टैंकर (जहाज) पर तैनात थे। ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव के दौरान, यह जहाज संदिग्ध रूप से एक मिसाइल हमले की चपेट में आ गया। मिसाइल जहाज के अगले हिस्से में गिरी, जिससे जहाज बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। धमाका इतना जोरदार था कि जहाज का अगला हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया।

पायलट के पास थी ड्यूटी, बिहार के कैप्टन की भी मौत
हादसे के समय दलीप की ड्यूटी जहाज के अगले हिस्से में पायलट के बिल्कुल नजदीक थी। कंपनी की ओर से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस हमले में दलीप के साथ उनके एक अन्य भारतीय साथी, बिहार निवासी कैप्टन आशीष कुमार की भी मौत हो गई है। राहत और बचाव कार्य के दौरान पायलट का शव बरामद कर लिया गया है, लेकिन दलीप के शव की तलाश अभी भी जारी है। समुद्र की लहरों और क्षतिग्रस्त मलबे के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

परिजनों में कोहराम, सरकार से मदद की गुहार
दलीप की मौत की खबर जैसे ही कंपनी की ओर से खींवताना स्थित उनके घर पहुँची, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। गांव में सन्नाटा पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। दलीप अपने परिवार का सहारा थे और सात समंदर पार देश का नाम रोशन कर रहे थे। अब परिवार और ग्रामीण केंद्र सरकार व विदेश मंत्रालय से गुहार लगा रहे हैं कि दलीप के पार्थिव देह को जल्द से जल्द भारत लाने के प्रयास किए जाएं ताकि उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव में सम्मान के साथ हो सके। यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध की उन भयावह विभीषिकाओं को दर्शाती है, जहाँ निर्दोष कामगारों और नाविकों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। नागौर का यह लाल अब सिर्फ यादों में शेष है, लेकिन उनकी शहादत ने युद्ध की संवेदनशीलता को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

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