भागलपुर।न्यूजस्टिच
जिस नीलगाय को किसान अब तक अपनी लहलहाती फसलों का सबसे बड़ा दुश्मन मानते थे, वही अब उनकी तकदीर बदलने वाली है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा क्रांतिकारी शोध किया है, जिससे नीलगाय अब बोझ नहीं बल्कि ‘कमाई की मशीन’ साबित होगी। अब किसानों को नीलगाय को खेतों से भगाने या मारने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि वे इसे गाय-बकरी की तरह पालकर बंपर मुनाफा कमा सकेंगे।
खेतों का विलेन अब बनेगा हीरो
BAU के अंतर्गत आने वाले वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय डुमराव के वैज्ञानिकों की टीम 2019 से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी। शोध में यह बात सामने आई है कि नीलगाय एक ऐसा जीव है जो इंसानों के साथ आसानी से घुल-मिल सकता है। इसमें बकरी, ऊंट और हिरण तीनों के गुण पाए जाते हैं, जो इसे पशुपालन के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनाते हैं।
गोबर में मिला पोषक तत्वों का खजाना
बीएयू के वैज्ञानिकों के अनुसार नीलगाय की लेड़ी (अपशिष्ट) साधारण खाद नहीं है। इसमें मैग्नीशियम और जिंक की प्रचुर मात्रा पाई गई है। इससे कई फायदे होंगे। यह खाद तिलहन, दलहन, फल और सब्जियों के लिए अमृत के समान है। किसानों को अब बाजार से महंगे जिंक और मैग्नीशियम सप्लीमेंट खरीदने की जरूरत नहीं होगी।
₹1000 किलो दूध की संभावना?
सबसे चौंकाने वाला खुलासा इसके दूध को लेकर है। वैज्ञानिक अब इसके दूध की गुणवत्ता पर अंतिम शोध कर रहे हैं। यदि इसके औषधीय गुण ऊंट के दूध के समान पाए जाते हैं, तो बाजार में इसकी कीमत 1000 रुपये प्रति किलो तक हो सकती है। इसके अलावा, इसके व्यावसायिक पालन से मीट और अन्य उत्पादों के जरिए भी लाखों की कमाई की राह खुल रही है।

