पूर्णिया। न्यूजस्टिच
मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा को लेकर पूर्णिया में सियासी पारा चढ़ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के जिला प्रवक्ता डॉ.आलोक राज ने इस यात्रा पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे जनहित की नहीं, बल्कि भ्रष्ट अधिकारियों की धनवृद्धि यात्रा करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर निकाली गई यह यात्रा वास्तव में सरकारी संसाधनों की बर्बादी और दिखावे की राजनीति का नया अध्याय है।
जनता की बुनियादी समस्याओं से दूरी
डॉ.आलोक राज ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जिस प्रदेश में आम आदमी रसोई का चूल्हा जलाने के लिए संघर्ष कर रहा हो और गैस की किल्लत से जूझ रहा हो, वहां सत्ता का यह भव्य काफिला जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने कहा कि समृद्धि यात्रा के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई पानी की तरह बहाई गई, लेकिन आम लोगों की असल समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री की ओर से कोई ठोस घोषणा नहीं हुई।
स्वास्थ्य और उद्योग के दावों की पोल
जिले की बदहाल व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए प्रवक्ता ने कहा कि चरमराई स्वास्थ्य सेवा है। पूर्णिया के अस्पतालों में दलालों का बोलबाला है। मेडिकल कॉलेज की बातें सिर्फ मंचों तक सीमित हैं, धरातल पर स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह ध्वस्त है। पिछले 20 वर्षों में बिहार में कोई बड़ा उद्योग स्थापित नहीं हुआ। रोजगार के अभाव में युवा आज भी पलायन को मजबूर हैं। ऐसे में उद्योगों का दावा करना राजनीतिक बेईमानी है। सबसे तीखी आलोचना मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के कारण माता पूरन देवी मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर लगी रोक को लेकर हुई। डॉ.राज ने कहा कि दो दिनों तक आम जनता के लिए मंदिर के द्वार बंद करना लोकतंत्र नहीं, बल्कि उस ‘राजतंत्र’ की याद दिलाता है जहां शासक की सुविधा के आगे प्रजा की आस्था को गौण मान लिया जाता है।
लोकतंत्र या औपनिवेशिक प्रदर्शन?
डॉ.आलोक राज ने यात्रा के दौरान सड़कों पर आम आवाजाही बाधित होने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनसुविधा सर्वोपरि होनी चाहिए, लेकिन यहां सत्ता का प्रदर्शन आम जनता की परेशानी का कारण बना। राजद प्रवक्ता ने अंत में चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब जनता की आस्था और सुविधाओं को नजरअंदाज कर सत्ता का तमाशा दिखाया जाता है, तो जनता समय आने पर इसका हिसाब जरूर चुकता करती है।

