बिहार पुलिस की कार्यशैली और जनता के प्रति उनकी संवेदनशीलता पर पूर्णिया आईजी (IG) विवेकानंद ने एक कड़ा संदेश दिया है। आईजी ने कर्तव्यहीनता और लापरवाही के आरोप में केनगर थानाध्यक्ष मुन्ना पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है।
मामला: एक महीने तक चक्कर काटती रही बेबस मां
घटना की जड़ें केनगर थाना क्षेत्र के परोरा गांव से जुड़ी हैं। यहाँ की रहने वाली चैती देवी का 18 वर्षीय पुत्र किशन कुमार, जो बोल और सुन नहीं सकता, बीते 29 दिसंबर 2025 से लापता है। पीड़ित माँ ने अगले ही दिन 30 दिसंबर को थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन थानाध्यक्ष ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। “सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि गुमशुदगी के मामलों में अविलंब प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए। थानाध्यक्ष की यह कार्यशैली मानवीय संवेदनाओं के प्रति शून्यता को दर्शाती है।”
जनसुनवाई में खुला लापरवाही का कच्चा चिट्ठा
थानाध्यक्ष ने 30 जनवरी 2026 तक, यानी पूरे एक महीने तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की थी। जब पीड़ित महिला न्याय की उम्मीद में आईजी की जनसुनवाई में पहुंची और अपना दुखड़ा सुनाया, तब इस गंभीर लापरवाही का खुलासा हुआ। आईजी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जवाब तलब किया और संतोषजनक उत्तर न मिलने पर निलंबन का आदेश जारी कर दिया।
विभागीय कार्रवाई और हड़कंप
इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए पूर्णिया एसपी स्वीटी सहरावत ने कहा कि एक दिव्यांग युवक के मिसिंग केस में एफआईआर दर्ज न करना एक गंभीर चूक है। मुन्ना पटेल के विरुद्ध अब विभागीय जांच भी चलाई जाएगी। इस कड़े फैसले के बाद जिले के अन्य थानों में भी हड़कंप मच गया है। यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि जनता की सुरक्षा और कानून के पालन में किसी भी स्तर की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

