बिहार का पूर्णिया सिविल कोर्ट इन दिनों अपराधियों के निशाने पर है या फिर यह किसी की सोची-समझी साजिश है? सोमवार को एक बार फिर कोर्ट प्रशासन के आधिकारिक ईमेल पर आई एक धमकी ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए। ‘कोर्ट को बम से उड़ा दिया जाएगा’महज एक लाइन के इस संदेश ने न्याय के मंदिर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया।
फरवरी के बाद अप्रैल: क्या प्रशासन को चुनौती दे रहा है सिरफिरा?
इस खबर का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि 13 फरवरी को भी ठीक इसी तरह का ईमेल आया था। अब ठीक दो महीने बाद फिर से उसी अंदाज में धमकी दी गई है। यह संयोग है या प्रयोग? क्या कोई शरारती तत्व पुलिस की जांच क्षमता को परख रहा है या फिर यह किसी बड़ी साजिश की आहट है? बार-बार एक ही संस्थान को निशाना बनाना पूर्णिया पुलिस की साइबर सेल के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
ऑपरेशन ‘चप्पा-चप्पा’: जब फाइलों के बीच पहुंचा डॉग स्क्वायड
धमकी मिलते ही कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई। मुकदमों की पैरवी छोड़कर वकील और क्लाइंट सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। कुछ ही देर में बम निरोधक दस्ता (BDDS) और डॉग स्क्वायड की टीमों ने मोर्चा संभाल लिया। मुख्य भवन से लेकर रिकॉर्ड रूम की धूल फांकती फाइलों तक और पार्किंग में खड़ी गाड़ियों से लेकर अधिवक्ता संघ के कमरों तक, चप्पे-चप्पे को खंगाला गया। हालांकि, घंटों की मशक्कत के बाद कोई विस्फोटक नहीं मिला, लेकिन दहशत के साये ने पूरे दिन काम-काज को प्रभावित रखा।
किलेबंदी: अब बिना ‘आईडी कार्ड’ नो एंट्री
इस बार प्रशासन ने केवल जांच ही नहीं की, बल्कि सुरक्षा के प्रोटोकॉल को भी बदल दिया है:
- अनिवार्य चेकिंग: मेटल डिटेक्टर अब केवल दिखावा नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की अनिवार्य जांच का जरिया बन गया है।
- क्लाइंट्स पर पाबंदी: आज के लिए गैर-जरूरी बाहरी लोगों (क्लाइंट्स) के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
- वकीलों के लिए अपील: गेट पर नोटिस चस्पा कर अधिवक्ताओं से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और सहयोग करने की अपील की गई है।
वकीलों का आक्रोश: “हवा में है सुरक्षा व्यवस्था”
बार-बार मिल रही धमकी से वकीलों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि 13 फरवरी की घटना के बाद अगर ठोस कार्रवाई हुई होती और अपराधी पकड़ा जाता, तो आज दोबारा यह स्थिति पैदा नहीं होती। अधिवक्ता संघ ने अब कोर्ट की स्थायी और पुख्ता सुरक्षा (Permanent High Security) की मांग दोहराई है।
साइबर सेल के रडार पर ‘धमकी वाला एड्रेस’
फिलहाल, साइबर सेल की टीम उस आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रैक करने में जुटी है जिससे मेल भेजा गया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पिछली बार और इस बार के मेल के बीच के कनेक्शन को खंगाला जा रहा है।

