बिहार के पूर्णिया जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था इस वक्त गंभीर सवालों के घेरे में है। जिले में सक्रिय फर्जी डॉक्टरों, अवैध पैथोलॉजी लैब और अस्पतालों में जड़ें जमा चुके दलालों के नेटवर्क के खिलाफ समाजसेवी सह विश्वविद्यालय बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ. आलोक राज ने मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भेजे एक खुला मांग पत्र के जरिए उन्होंने जिले की चिकित्सा व्यवस्था को स्वास्थ्य माफिया के चंगुल से आजाद कराने की पुरजोर वकालत की है।
अनोखा प्रदर्शन: मांग पत्र बना शरीर का परिधान
डॉ. आलोक राज ने अपने विरोध को दर्ज कराने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने अपनी मांगों को एक वस्त्र पर लिखकर उसे धारण किया, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। उनका कहना है कि सरकारी प्रयासों के बावजूद जमीनी हकीकत डरावनी है।
प्रमुख मांगें: जिन पर टिकी हैं हजारों जिंदगियां
डॉ. आलोक राज ने अपने पत्र में कई ज्वलंत मुद्दों को उठाया है:
- अवैध संस्थानों पर नकेल: जिले में संचालित फर्जी क्लीनिक, मानकों के विपरीत चल रहे नर्सिंग होम और अवैध अल्ट्रासाउंड/एक्स-रे सेंटरों की सघन जांच कर उन्हें सील किया जाए।
- दलालों का नेटवर्क: सरकारी और निजी अस्पतालों में सक्रिय दलालों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाए जाएं।
- राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय (GMCH) का सुधार: पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त डॉक्टरों की नियुक्ति, आधुनिक मशीनों की उपलब्धता और दवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित हो।
- निजी प्रैक्टिस पर रोक: सरकारी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा निजी प्रैक्टिस करने पर पूर्ण प्रतिबंध और उल्लंघन पर कारावास का प्रावधान हो।
- फास्ट ट्रैक ट्रायल: फर्जी डॉक्टरों और अवैध सेंटर चलाने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सजा दिलाई जाए।
“आर्थिक और शारीरिक शोषण का अड्डा बना पूर्णिया”
डॉ. राज ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में यह अवैध धंधा फल-फूल रहा है। ग्रामीण इलाकों से आने वाले भोले-भाले मरीज इन दलालों के जाल में फंसकर अपनी जमा-पूंजी भी गंवा रहे हैं और गलत इलाज के कारण जान जोखिम में डाल रहे हैं।
“स्वास्थ्य व्यवस्था किसी भी समाज की आधारशिला होती है। इसे माफिया मुक्त करना अब जनहित में अनिवार्य हो गया है।” – डॉ. आलोक राज
प्रशासन के सामने चुनौती
डॉ. आलोक राज की इस मांग ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस ‘खुले मांग पत्र’ पर क्या संज्ञान लेता है और पूर्णिया के लोगों को ‘फर्जी डॉक्टरों’ के आतंक से कब मुक्ति मिलती है।

