नगर विकास अंचल एवं पूर्णिया नगर निगम में विकास योजनाओं की निविदाओं (Tenders) को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। स्थानीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा अधीक्षण अभियंता (असैनिक) मोहम्मद रैय्यान हैदर और सहायक अभियंता संजय कुमार द्विवेदी पर पद के दुरुपयोग, निजी लाभ के लिए निविदाओं को लटकाने व निरस्त करने और अवैध कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव तथा पूर्णिया के जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मामले की उच्चस्तरीय जांच और कड़े दंडात्मक कदम उठाने की मांग की गई है।

कमीशनखोरी और पक्षपात के आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कार्यालय में बिना अवैध वसूली (कमीशन) के किसी भी निविदा का निष्पादन नहीं किया जाता। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर एक ही परिवार के दो ठेकेदारों को तकनीकी रूप से सफल घोषित कर दिया गया, जबकि तकनीकी कमियों का हवाला देकर अन्य पांच संवेदकों को अयोग्य ठहरा दिया गया। विशेष रूप से NIT – 06/2025-26, NIT – 14/25-26 और NIT – 16/25-26 में व्यापक अनियमितताओं की बात कही गई है।
बिना सूचना गायब रहने और मिलीभगत का दावा
आवेदनों के अनुसार, अधीक्षण अभियंता अक्सर बिना किसी आधिकारिक सूचना के पूर्णिया कार्यालय से अनुपस्थित रहते हैं। उनकी गैरमौजूदगी में सहायक अभियंता संजय कुमार द्विवेदी और कंप्यूटर ऑपरेटर वासुकी नाथ ठाकुर द्वारा अनैतिक गतिविधियां और मनमाने तरीके से काम का संचालन किया जाता है। बीते एक वर्ष से कई महत्वपूर्ण निविदाओं को तकनीकी स्वीकृति (Technical Sanction) नहीं दी गई है, जिससे विकास कार्य ठप पड़े हैं।
21 जनवरी की बोर्ड बैठक का प्रस्ताव भी लंबित
अधिकारियों की स्वेच्छाचारी कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर पूर्णिया नगर निगम बोर्ड की बैठक में 21 जनवरी 2026 को ही अधीक्षण अभियंता को पद से हटाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था, जो कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण अब तक लंबित है।
विकास कार्य प्रभावित, जनता परेशान
अधिकारियों के इस ढुलमुल रवैये के कारण सड़क, नाला और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पा रही हैं। आवंटित विकास फंड समय पर खर्च न होने से आगामी मानसून के दौरान शहरवासियों को जलजमाव और कुव्यवस्था का सामना करना पड़ सकता है। स्थानीय स्तर पर मांग की गई है कि अधिकारियों के मोबाइल लोकेशन की जांच कर उनकी अनुपस्थिति की पुष्टि की जाए और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करने हेतु त्वरित कार्रवाई की जाए।

