पटना। न्यूजस्टिच
बिहार विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान आज उस वक्त सियासी पारा गरमा गया, जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एमएलसी कारी सोहेब ने सदन में गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की मांग उठा दी। कारी सोहेब ने न केवल धार्मिक आस्था का हवाला दिया, बल्कि इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जमकर घेरा और गंभीर आरोप लगाए।
भाजपा गो-हत्यारों से ले रही है चंदा
कारी सोहेब ने सदन में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए भाजपा पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो भाजपा गाय के नाम पर वोट मांगती है। वही पार्टी आज गो-हत्या करने वालों से चंदा ले रही है। यह विडंबना है कि उसी चंदे के पैसे से पार्टी के झंडे खरीदे जा रहे हैं और संगठन चलाया जा रहा है।
गोमांस निर्यात पर सरकार को घेरा
आरजेडी एमएलसी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि भाजपा के शासनकाल में गोमांस (Beef) के निर्यात को बढ़ावा मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ गाय को लेकर राजनीति की जाती है, तो दूसरी तरफ निर्यात के जरिए मुनाफा कमाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि अगर भाजपा वास्तव में गाय की संरक्षक है, तो उसे तत्काल गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करना चाहिए।
सदन में हुआ भारी हंगामा
कारी सोहेब के इन बयानों के बाद सत्ता पक्ष (NDA) के सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया, जिससे सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। राजद की ओर से तर्क दिया गया कि गाय केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इसे संवैधानिक दर्जा मिलना ही चाहिए।
कौन हैं कारी सोहेब?
कारी सोहेब का पूरा नाम मोहम्मद सोहैब है। बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एक प्रमुख युवा नेता हैं। उनके बारे में मुख्य जानकारी निम्नलिखित है। वह वर्तमान में बिहार विधान परिषद (MLC) के सदस्य हैं। उन्हें 2022 में बिहार विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी के रूप में चुना गया था। वह राजद (RJD) की युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष हैं। साथ ही, उन्हें राजद यूथ विंग का राष्ट्रीय प्रधान महासचिव भी बनाया गया है। उनका जन्म 1 फरवरी 1983 को हुआ था। वे बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं। उनके पिता का नाम नसीम अहमद है। उन्होंने पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से BBA (बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन) की डिग्री प्राप्त की है। वे सदन और सार्वजनिक मंचों पर अपने तीखे और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने समय-समय पर बेरोजगारी, वक्फ बिल और अब गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने जैसे मुद्दों को उठाकर राजनीतिक चर्चा बटोरी है।

