शेखपुरा । न्यूजस्टिच
मुंगेर प्रमंडल के शेखपुरा जिले से एक ऐसी वारदात सामने आई है जिसने कानून और व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक ताने-बाने पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ आपसी अविश्वास और पारिवारिक कलह का अंत दोहरी त्रासदी के रूप में हुआ। गुरुवार सुबह कैंथवा रेलवे क्रॉसिंग के पास एक शख्स ने अपनी ही पत्नी को मौत के घाट उतारने की कोशिश की, लेकिन कुदरत का न्याय कहें या भीड़ का उन्माद—महज कुछ ही मिनटों में आरोपी पति को भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
घात लगाकर हमला, फिर खूनी तांडव
जानकारी के अनुसार, सुल्तानपुर गांव निवासी दीपक ठाकुर का अपनी पत्नी प्रतिमा देवी से लंबे समय से विवाद चल रहा था। गुरुवार सुबह करीब 10 बजे प्रतिमा देवी अपने सात वर्षीय मासूम बेटे रवीश कुमार के साथ टोटो पर सवार होकर अपनी बहन के घर जा रही थी। दीपक पहले से ही कैंथवा रेलवे क्रॉसिंग पर घात लगाकर बैठा था। जैसे ही टोटो करीब आया, दीपक ने टोटो रोककर अपनी पत्नी पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
मासूम को भी लगी गोली, इलाके में सनसनी
दीपक ने अपनी पत्नी के गर्दन और जबड़े को निशाना बनाकर गोलियां दागीं। इस दौरान बगल में बैठे सात वर्षीय बेटे रवीश को भी गोली लग गई। गोलियों की तड़तड़ाहट से इलाका दहल उठा। प्रतिमा देवी लहूलुहान होकर गिर पड़ीं, जिन्हें नाजुक हालत में शेखपुरा सदर अस्पताल से पावापुरी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।
जब भीड़ बनी जज और जल्लाद
वारदात को अंजाम देकर जब दीपक भागने लगा, तो स्थानीय लोगों ने उसे घेरने की कोशिश की। खुद को घिरता देख दीपक ने ग्रामीणों पर भी बंदूक तान दी और फायरिंग करने लगा। दीपक की इस हिमाकत ने लोगों के गुस्से को दावानल बना दिया। सैकड़ों की भीड़ ने उसे खदेड़कर पकड़ लिया और वहीं सड़क पर ‘ऑन द स्पॉट इंसाफ’ का खेल शुरू हो गया। आक्रोशित भीड़ ने दीपक को इतना पीटा कि मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
जांच में जुटी फॉरेंसिक और पुलिस टीम
घटना की सूचना मिलते ही शेखपुरा एसपी बलीराम चौधरी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया है ताकि घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा सकें। एसपी ने खुद मामले की कमान संभालते हुए जांच शुरू कर दी है।

