डिजिटल युग में ‘नाटक’ की मशाल जलाए है मुंगेर का यह गांव: शासन की बेरुखी के बावजूद 30 वर्षों से जारी है मंचन की परंपरा
डिजिटल युग के शोर में मुंगेर का एक गांव आज भी रंगमंच की मशाल जलाए हुए है। 1995 से शुरू हुआ यह सफर गंगा कटाव और विस्थापन के बावजूद थमा नहीं है। आगामी सरस्वती पूजा पर यहाँ दो दिवसीय नाट्य महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है।

