पटना। न्यूजस्टिच
बिहार की राजनीति में एक बार फिर से बड़े उलटफेर की आहट सुनाई दे रही है। चर्चा है कि बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अब राज्यसभा का रुख कर सकते हैं। यह खबर न केवल राजद (RJD) के अंदरूनी समीकरणों को बदल देगी, बल्कि राघोपुर विधानसभा सीट और यादव परिवार की राजनीतिक विरासत को लेकर भी नए सवाल खड़े कर रही है।
तेजस्वी का राज्यसभा दांव: बिहार की सियासत में नया मोड़
ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के अनुसार, आरजेडी और विपक्षी गठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव राज्यसभा के उम्मीदवार हो सकते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों का भी उन्हें मौन समर्थन मिलने की अटकलें लगाई जा रही हैं। यदि तेजस्वी राज्यसभा जाने में कामयाब होते हैं, तो यह बिहार की राजनीति में उनका कद राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
राघोपुर सीट पर राजश्री यादव की एंट्री?
तेजस्वी यादव वर्तमान में वैशाली जिले की राघोपुर सीट से विधायक हैं। अगर वे राज्यसभा सांसद चुने जाते हैं, तो संवैधानिक नियमों के अनुसार उन्हें विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। ऐसी स्थिति में राघोपुर सीट खाली हो जाएगी और वहाँ उपचुनाव (By-election) होना तय है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि लालू परिवार इस पारंपरिक सीट को अपने पास रखने के लिए तेजस्वी की पत्नी राजश्री यादव को चुनावी मैदान में उतार सकता है। राजश्री का राजनीति में यह पहला आधिकारिक कदम हो सकता है, जो राघोपुर में यादव परिवार की पकड़ को बरकरार रखेगा।
राजद का सीटों का गणित, विधानसभा और राज्यसभा
बिहार की 18वीं विधानसभा (2025 के चुनाव परिणाम के बाद) में राजद और एनडीए की स्थिति इस प्रकार है। बिहार विधानसभा 25 सीटें है। राजद मुख्य विपक्षी दल है। महागठबंधन में कुल 35 सीटें हैं। राज्यसभा बिहार से 05 सीटें खाली हुई थी। इसमें राजद से प्रेम चंद्र गुप्ता और अहमद अशफाक करीम का कार्यकाल समाप्त हुआ। 2025 के विधानसभा चुनावों में राजद को सीटों का भारी नुकसान उठाना पड़ा था। पार्टी 75 से घटकर 25 सीटों पर सिमट गई थी। ऐसे में राज्यसभा की एक सीट सुरक्षित करना तेजस्वी के लिए बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसके लिए कम से कम 40 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी।
पॉलिटिकल एंगल, क्या है मास्टरप्लान?
तेजस्वी का दिल्ली जाना बिहार में राजद की कमान किसी और को सौंपने का संकेत भी हो सकता है, या फिर यह केंद्र की राजनीति में लालू प्रसाद यादव की सक्रियता को तेजस्वी के जरिए बढ़ाने की रणनीति है। सत्ता पक्ष के विधायकों के समर्थन की चर्चा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खेमे में भी खलबली मचा दी है।

