देश की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ माने जाने वाले केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के प्रशासनिक और परिचालन ढांचे को और अधिक सुव्यवस्थित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 25 मार्च, 2026 को ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026’ राज्यसभा में पेश किया गया। यह विधेयक सीएपीएफ के अधिकारियों की भर्ती, पदोन्नति और सेवा शर्तों से संबंधित नियमों को नई दिशा देने और कानूनी स्पष्टता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।
विधेयक का मुख्य उद्देश्य
इस विधेयक का प्राथमिक लक्ष्य वर्तमान विधायी व्यवस्था को और अधिक स्पष्ट बनाना है। सरकार का तर्क है कि इससे परिचालन विशिष्टता बनी रहेगी और विभिन्न न्यायिक निर्देशों को प्रशासनिक एवं संघीय आवश्यकताओं के साथ सामंजस्य बिठाने में मदद मिलेगी। वर्तमान में ये बल अपने-अपने विशिष्ट अधिनियमों द्वारा शासित होते हैं, लेकिन नया विधेयक केंद्र सरकार को एकीकृत नियम बनाने की शक्ति प्रदान करता है।
केंद्र सरकार की बढ़ी शक्तियां और नियम बनाने का अधिकार
विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, केंद्र सरकार अब सीएपीएफ अधिकारियों की सेवा शर्तों पर विशेष नियम बना सकती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शक्ति ‘ओवरराइडिंग पावर’ के रूप में दी गई है। यानी, केंद्र सरकार किसी अन्य कानून, पिछले सरकारी आदेश या यहां तक कि किसी न्यायालय के पुराने फैसले के बावजूद नए नियम बना सकती है।
दायरे में आने वाले बल और अधिकारी
यह विधेयक प्रारंभिक तौर पर अनुसूची में सूचीबद्ध पाँच प्रमुख बलों पर लागू होगा:
- CRPF (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल)
- BSF (सीमा सुरक्षा बल)
- CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल)
- ITBP (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस)
- SSB (सशस्त्र सीमा बल)
सरकार अधिसूचना के माध्यम से अन्य बलों को भी इस दायरे में ला सकती है। इसके तहत सहायक कमांडेंट (ग्रुप-ए) और उससे ऊपर के अधिकारी, आईपीएस (IPS) प्रतिनियुपर आए अधिकारी और भारतीय सेना से आए अधिकारी शामिल होंगे।
IPS प्रतिनियुक्ति के लिए कोटा निर्धारित
विधेयक में उच्च पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को लेकर स्पष्ट खाका खींचा गया है। प्रावधान के अनुसार:
• महानिरीक्षक (IG): 50% पद आईपीएस अधिकारियों द्वारा भरे जाएंगे।
• अतिरिक्त महानिदेशक (ADG): कम से कम 67% पद आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित होंगे।
• महानिदेशक (DG) और विशेष महानिदेशक (Special DG): इनके सभी पद आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति द्वारा भरे जाएंगे।
वित्तीय लाभ और वर्तमान स्थिति
विधेयक यह सुनिश्चित करता है कि जब तक नए नियम अधिसूचित नहीं हो जाते, तब तक पुराने अधिनियमों के तहत चल रहे नियम और वित्तीय लाभ (Financial Benefits) प्रभावी रहेंगे। किसी भी प्रकार की कानूनी असंगति होने पर, इस नए विधेयक के प्रावधानों को ही सर्वोपरि माना जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधेयक आने वाले समय में कैडर अधिकारियों और प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों के बीच के प्रशासनिक संतुलन को एक नया वैधानिक आधार प्रदान करेगा।

