पूर्णिया जिला का धमदाहा अनुमंडल 90 के दशक के बाद तक नक्सलियों के प्रभाव-क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। इस अनुमंडल का रुपौली प्रखंड विशेष तौर पर नक्सलियों और आपराधिक-गिरोहों का पनाहगाह माना जाता था। क्योंकि, यह इलाका भौगौलिक रूप से दुरूह है और भागलपुर जिला के दियारा क्षेत्र के करीब है। लेकिन कालांतर में विकास की रोशनी पहुंची और खाली पड़ी जमीनें मक्का के रूप में सोना उगलने लगी। उसके बाद नक्सलियों के भय से गांव छोड़ चुके लोगों की वापसी भी शुरू हुई तो पूरी फिजां ही बदल गई। जब माहौल बदला, आर्थिक समृद्धि आई तो शिक्षा की भी बयार बहनी शुरू हुई। नतीजा सामने है कि नक्सलियों के पनाहगाह रहे बैरिया ने स्टेट टॉपर दिया है। लिहाज़ा पूरे इलाके में जश्न का माहौल है और गली-मोहल्ले में अंश की सफलता की चर्चा आम है।
मक्का के रास्ते आर्थिक समृद्धि ने दी दस्तक
रुपौली प्रखंड में मक्का की व्यापक पैमाने पर खेती की शुरुआत हुई। इस रास्ते आर्थिक समृद्धि ने दस्तक दी और फिजा बदली तो शिक्षा की मशाल भी जल उठी। उसी नक्सल-प्रभावित इलाके रुपौली प्रखंड के उत्क्रमित हाई स्कूल, बैरिया के छात्र अंशराज ने अब बिहार बोर्ड की परीक्षा में 97.4 फीसदी अंक लाकर राज्य में चौथा स्थान हासिल किया है। सामान्य पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले अंशराज अपनी सफलता पर कहते हैं कि उम्मीद थी बेहतर रिज़ल्ट आएगा, लेकिन टॉपर में शामिल होंगे यह तब पता चला जब बिहार बोर्ड द्वारा वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया। इस सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को जाता है।
बचपन से ही अंशराज ने किया गांव में पढ़ाई
सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि से होने के वजह से अंशराज शहर जाकर पढ़ाई की बात सोच भी नहीं सकता था। लिहाज़ा गांव में ही रहकर उसने अपनी पढ़ाई पूरी की। अंश ने तैयारी के दौरान ऑनलाइन और ऑफ लाइन कोचिंग का सहारा लिया। इसके अलावा वह 6 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी भी किया करता था। अंश के शिक्षक सुमित कुमार कहते हैं कि अंश बचपन से ही मेधावी था। लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण बात यह थी कि उसमें कुछ कर गुजरने का जज्बा था, जो उसे अन्य छात्रों से अलग करता था। मुझे अंश में संभावना नजर आती थी। छात्र की सफलता ही शिक्षक की सफलता का पैमाना होता है।
पिता एम्बुलेंस तकनीशियन तो मां है शिक्षिका
अंशराज के पिता मुकेश कुमार रुपौली प्रखंड के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मोहनपुर में एम्बुलेंस पर तकनीकी सहायक के पद पर तैनात हैं। जबकि मां ब्यूटी कुमारी उसी विद्यालय में संगीत शिक्षिका हैं। जहां अंशराज पढ़ाई करता था। गांव की फिजां पहले भले ही उस दौर में बारूदी थी। लेकिन अंश के दादा स्व रामबली यादव सरकारी स्कूल के शिक्षक हुआ करते थे और अंश को पढ़ाई-लिखाई का माहौल विरासत में मिला है। अंश को बचपन मे दादा का भी सानिध्य मिला तो बाद में सानिध्य की कमान मां ब्यूटी कुमारी ने बखूबी संभाली। बेटे की शानदार सफलता से आह्लादित ब्यूटी कुमारी कहती हैं ‘अंश मेहनती था और समय के साथ-साथ पढ़ाई में बेहतर करता चला गया। उम्मीद थी कि जिला टॉपर बनेगा लेकिन उसने उम्मीद से बेहतर किया है जो गर्व की बात है। पिता मुकेश कुमार कहते हैं ‘ बहुत खुशी हो रही है .बेटा ने आज अपने दादा के सपने को साकार किया है।
विज्ञान और गणित पसंदीदा विषय, इंजिनियर बनने की खाव्हिश
अंश के अनुसार,उसका पसंदीदा विषय गणित और विज्ञान है। अंश को गणित में 100 में से 97 अंक और विज्ञान में 100 में से 99 अंक प्राप्त हुए। जबकि उसे संस्कृत में 99 और समाज विज्ञान में 96 अंक प्राप्त हुए। भविष्य की रूपरेखा बताते हुए अंशराज ने कहा कि ‘इंटरमीडियट वह गणित के साथ करना चाहता है.उसके बाद आई आई टी की प्रवेश-परीक्षा पास कर सॉफ्टवेयर इंजिनीयर बनना चाहता है।

