आज का दिन खगोल प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। मंगलवार की शाम अंतरिक्ष में एक अद्भुत खगोलीय घटना घटने जा रही है—पूर्ण चंद्र ग्रहण। इस बार का ग्रहण इसलिए खास है क्योंकि इसका परिमाण (Magnitude) 1.155 है, जिसका अर्थ है कि चंद्रमा पृथ्वी की सबसे गहरी छाया (Umbra) के बिल्कुल बीच से गुजरेगा, जिससे वह गहरा लाल या तांबे जैसा यानी ‘ब्लड मून’ दिखाई देगा।
क्या है पूर्ण चंद्र ग्रहण का विज्ञान?
पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच इस तरह आ जाती है कि चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की प्रच्छाया (Umbra) से ढक जाता है। इस दौरान सीधी धूप चंद्रमा तक नहीं पहुँच पाती, लेकिन पृथ्वी के वायुमंडल से टकराकर मुड़ने वाली सूर्य की रोशनी उसे लाल आभा देती है। वहीं, आंशिक ग्रहण में चंद्रमा का केवल एक हिस्सा ही अंधेरे में छिपता है।
भारत में नजारा: कब और कहां?
भारतीय समय के अनुसार, ग्रहण की प्रक्रिया दोपहर 3:20 बजे शुरू हो जाएगी। हालांकि, भारत के अधिकांश हिस्सों में ग्रहण तब दिखाई देगा जब शाम को चंद्रोदय होगा।
पूर्णता का रोमांच: शाम 4:34 बजे पूर्ण ग्रहण शुरू होगा और 5:33 बजे तक रहेगा।
विशेष दृश्यता: उत्तर-पूर्वी भारत (जैसे असम, अरुणाचल) और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के लोगों के लिए यह अनुभव सबसे यादगार होगा, क्योंकि वहां ‘टोटैलिटी’ (पूर्णता) का अंत भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। शेष भारत में लोग चंद्रोदय के समय ग्रहण को समाप्त होते हुए देख पाएंगे।

प्रमुख समय (IST) पर एक नजर:
ग्रहण का आरंभ: दोपहर 3:20 बजे
पूर्णता की शुरुआत: शाम 4:34 बजे
पूर्णता का समापन: शाम 5:33 बजे
ग्रहण की पूर्ण समाप्ति: शाम 6:48 बजे
वैश्विक प्रभाव और दृश्यता
भारत के अलावा, यह ‘डीप लूनर एक्लिप्स’ पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के आसमान में भी अपनी छटा बिखेरेगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, 1.155 का मैग्नीट्यूड इसे हाल के वर्षों के सबसे ‘डार्क’ ग्रहणों में से एक बनाता है।
सावधानी और रोचक तथ्य
सूर्य ग्रहण के विपरीत, चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी विशेष चश्मे या फिल्टर की आवश्यकता नहीं होती। इसे नंगी आँखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है। ज्योतिषीय मान्यताओं के कारण मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे, वहीं विज्ञान केंद्रों में टेलिस्कोप के जरिए इसे दिखाने की विशेष व्यवस्था की गई है।

