जमशेदपुर/बहरागोड़ा | न्यूजस्टिच
पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा में एक ऐसी खोज हुई है जिसने सुरक्षा एजेंसियों से लेकर स्थानीय ग्रामीणों तक की धड़कनें बढ़ा दी हैं। स्वर्णरेखा नदी के गर्भ में दशकों से दबा एक विशालकाय 500 पाउंड का अमेरिकी बम बालू खुदाई के दौरान बाहर निकल आया है। माना जा रहा है कि यह बम द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) के समय का है और आज भी पूरी तरह सक्रिय व घातक है।
रांची की टीम ने खड़े किए हाथ: बेहद जटिल है मामला
हैरानी और चिंता की बात यह है कि इस बम की सूचना प्रशासन को दो दिन पहले ही मिल गई थी, लेकिन इसकी गंभीरता का अंदाजा लगाने में देरी हुई। जब रांची से बम निरोधक दस्ता (BDDS) मौके पर पहुँचा, तो विशेषज्ञों ने इसे सामान्य तरीके से डिफ्यूज करने से साफ इनकार कर दिया। टीम के अनुसार, बम इतना शक्तिशाली और संवेदनशील स्थिति में है कि इसमें जरा सी चूक बड़े जान-माल के नुकसान का कारण बन सकती है।
भारतीय सेना की विशेष यूनिट का इंतजार, इलाका सील
बम की मारक क्षमता को देखते हुए अब भारतीय सेना (Indian Army) की विशेष ‘डिस्पोजल यूनिट’ को बुलाया जा रहा है। एहतियात के तौर पर:
- पुलिस ने नदी के उस हिस्से और आसपास के 2-3 किलोमीटर के दायरे को पूरी तरह सील कर दिया है।
- प्रशासन लाउडस्पीकर के माध्यम से ग्रामीणों को नदी की ओर न जाने की सख्त चेतावनी दे रहा है।
- सुरक्षाकर्मियों को बम की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए तैनात किया गया है।
बहरागोड़ा में दहशत: तबाही मचाने में सक्षम है यह बम
500 पाउंड (लगभग 226 किलो) वजनी इस बम के निकलने के बाद बहरागोड़ा और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। जानकारों का कहना है कि अगर यह बम फटता है, तो इसकी धमक और विनाशकारी प्रभाव कई किलोमीटर तक महसूस किया जा सकता है। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में मित्र देशों के हवाई अड्डे हुआ करते थे, संभवतः यह बम उसी समय का है जो किसी कारणवश फट नहीं पाया था।
फिलहाल सबकी नजरें सेना की विशेष टीम पर टिकी हैं। यह देखना चुनौतीपूर्ण होगा कि घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में इस ‘विस्फोटक आफत’ को कैसे सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया जाता है।

