बिहार दिवस के शुभ अवसर पर राज्य के प्रति अटूट प्रेम और सम्मान व्यक्त करते हुए एक अत्यंत प्रेरणादायी संदेश सामने आया है। इस संदेश में न केवल बिहार की मिट्टी की सोंधी महक और सांस्कृतिक गौरव का जिक्र है, बल्कि राज्य के भविष्य को बदलने के लिए एक ठोस रोडमैप और निवेश की इच्छा भी जताई गई है। यह संदेश देश के मशहूर उद्योगपति अनिल अग्रवाल ने अपने सोशल मीडिया हेंडल पर दिया है।
“जड़ों से जुड़े रहें और गर्व से कहें- हम बिहारी हैं”
बिहार में बिताए अपने शुरुआती 15-20 सालों को याद करते हुए अनिल अग्रवाल ने लिखा है कि बिहार की मेहनत, ईमानदारी और हार न मानने का हुनर आज भी जीवन के हर मोड़ पर साथ चलता है। बिहार के युवाओं और युवतियों के लिए उन्होंने तीन महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा है कि
- बड़े सपने देखें, लेकिन अपनी जड़ों (Roots) को कभी न भूलें।
- शिक्षा को अपनी ताकत बनाए रखें, क्योंकि यही बिहार की सबसे बड़ी पहचान है।
- अपनी पहचान पर गर्व करें और दुनिया के किसी भी कोने में हों, सीना ठोक कर कहें कि “हम बिहारी हैं”।
बिहार में निवेश और ‘नंद घर’ का विजन
उद्योगपति अनिल अग्रवाल ने अपने पोस्ट में बिहार के लिए कुछ करने की इच्छा भी जाहिर की है। उन्होंने लिखा है बिहार में आर्थिक और सामाजिक विकासा के लिए कुछ करने की इच्छा है, पर सिर्फ भावनाओं तक सीमित न रहते हुए व्यावहारिकता भी जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही इस दिशा में बिहार में काम होगा।
निवेश की योजना: बिहार में निवेश (Investment) के अवसरों की तलाश की जा रही है, जहाँ भावनाओं के साथ-साथ ‘Feasibility’ (व्यावहारिकता) पर भी काम चल रहा है।
- नंद घर प्रोजेक्ट: राजस्थान में 10 हजार से अधिक ‘नंद घर’ (Nand Ghar) के सफल मॉडल को अब बिहार में लाने की तैयारी है। ये ऐसे केंद्र हैं जहाँ 6 साल तक के बच्चों को पौष्टिक आहार और शिक्षा मिलती है, साथ ही महिलाओं को कौशल विकास के जरिए आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाया जाता है।
“कोई बच्चा भूखा न सोए”
संदेश का सबसे मार्मिक हिस्सा वह संकल्प है जिसमें कहा गया कि बिहार का एक भी बच्चा भूखे पेट न सोए और यहाँ की प्रतिभावान महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों। यह केवल एक सपना नहीं, बल्कि इसे हकीकत में बदलने की तैयारी है।
बिहार: भारत की अगली बड़ी कहानी
नालंदा की ज्ञान परंपरा और आर्यभट्ट की विरासत को याद करते हुए यह विश्वास जताया गया कि आने वाले वर्षों में बिहार भारत की प्रगति की अगली बड़ी गाथा लिखेगा। अंत में “हम बिहारी, सब पे भारी” के नारे के साथ सभी को बिहार दिवस की शुभकामनाएं दी गईं।

