पूर्णिया। न्यूजस्टिच
बिहार सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पूर्णिया जिला प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई की है। सोशल मीडिया पर अश्लील डांस और शराब के गिलास के साथ वीडियो वायरल होने के मामले में बनमनखी अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ.प्रिंस कुमार सुमन को उनके पद और वित्तीय प्रभार से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया गया है। जिलाधिकारी अंशुल कुमार द्वारा की गई इस सख्त कार्रवाई से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा था। जिसमें डॉ.प्रिंस कुमार सुमन एक महिला के साथ कमरे में ‘पीले पीले ओ मोरे जानी’ गाने पर आपत्तिजनक डांस करते नजर आ रहे थे। वीडियो में उनके हाथ में एक गिलास भी दिखाई दे रहा है, जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि उसमें शराब (वाइन) थी। यह वीडियो होली के दिन का बताया जा रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स ने सरकारी पद की गरिमा और नैतिकता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।

स्पष्टीकरण मिला असंतोषजनक, गिरी गाज
वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित चिकित्सा पदाधिकारी और उनके साथ दिख रही एएनएम से स्पष्टीकरण मांगा था। जिलाधिकारी पूर्णिया ने प्राप्त स्पष्टीकरण को गहनता से जांचने के बाद उसे असंतोषजनक पाया और सीधे तौर पर अस्वीकृत कर दिया।
नई तैनाती और कानूनी शिकंजा
प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी ने निम्नलिखित आदेश जारी किए हैं। डॉ.प्रिंस कुमार सुमन को बनमनखी के प्रभारी पद से हटाकर बी-कोठी में साधारण चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में स्थानांतरित कर दिया गया है। संबंधित एएनएम को तत्काल प्रभाव से सीएचसी (CHC) बैसा में योगदान करने का आदेश दिया गया है। डीएम ने सिविल सर्जन पूर्णिया को निर्देशित किया है कि दोषियों के विरुद्ध प्रपत्र-“क” गठित कर अंतिम अनुमोदन और विभागीय कार्रवाई हेतु स्वास्थ्य विभाग, पटना को भेजा जाए।

बचाव में क्या बोले डॉक्टर?
मामला तूल पकड़ते देख डॉ.प्रिंस कुमार सुमन ने अपना बचाव करते हुए कहा कि वीडियो में दिख रही महिला उनकी साली है। वीडियो को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। हालांकि शराबबंदी वाले राज्य में हाथ में गिलास लेकर अश्लील नृत्य करने के कृत्य को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। बनमनखी अनुमंडल पदाधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि शुरुआती व्यस्तता के कारण मामला संज्ञान में देरी से आया, लेकिन अब जिलाधिकारी के निर्देश पर सख्त कदम उठाए जा चुके हैं। प्रशासन का यह कदम यह संदेश देता है कि सरकारी पद पर रहते हुए किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता और अनैतिकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

