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ऑटिज्म के लिए स्टेम सेल थेरेपी अब illegal? सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद NMC ने जारी की ये एडवाइजरी

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के इलाज के नाम पर स्टेम सेल थेरेपी (Stem Cell Therapy) का सहारा लेने वाले अस्पतालों और डॉक्टरों पर अब नकेल कस दी गई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने एक आधिकारिक एडवाइजरी जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि ऑटिज्म के इलाज के लिए स्टेम सेल का उपयोग पूरी तरह अवैध है।

यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के अनुपालन में उठाया गया है, जिसमें ऑटिज्म के लिए इस थेरेपी की वैज्ञानिक प्रमाणिकता पर सवाल उठाए गए थे।

NMC की एथिक्स और मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड (EMRB) ने स्पष्ट किया कि ऑटिज्म के उपचार के रूप में स्टेम सेल थेरेपी का कोई ठोस वैज्ञानिक आधार या स्थापित प्रोटोकॉल नहीं है। कई मामलों में यह देखा गया कि क्लीनिक इस थेरेपी के नाम पर मरीजों से मोटी रकम वसूल रहे थे, जबकि इसके परिणाम संदिग्ध थे।

NMC ने 25 मार्च को सभी मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और पंजीकृत डॉक्टरों को भेजे गए निर्देश में साफ किया है कि स्टेम सेल थेरेपी का उपयोग केवल 32 अनुमोदित बीमारियों (Approved Diseases) के लिए ही किया जा सकता है। इनमें मुख्य रूप से रक्त संबंधी विकार और कुछ विशेष प्रकार के कैंसर शामिल हैं:

  • ब्लड कैंसर: एक्यूट मायलोइड ल्यूकेमिया (AML), मल्टीपल मायलोमा।
  • गंभीर एनीमिया: अप्लास्टिक एनीमिया, थैलेसेमिया।
  • अन्य जटिल रोग: मल्टीपल स्क्लेरोसिस, ऑस्टियोपेट्रोसिस, जर्म सेल ट्यूमर और मायलोफाइब्रोसिस।

यह एडवाइजरी सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद आई है जिसमें ऑटिज्म के इलाज के लिए स्टेम सेल के उपयोग को “अनएथिकल” (अनैतिक) माना गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टेम सेल थेरेपी अभी भी कई क्षेत्रों में प्रयोगात्मक (Experimental) स्तर पर है और इसे बिना किसी पुख्ता प्रमाण के ऑटिज्म जैसे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के लिए ‘इलाज’ के रूप में प्रचारित करना गलत है।

  1. सख्त मनाही: ऑटिज्म के लिए स्टेम सेल थेरेपी का प्रचार या अभ्यास अब ‘व्यावसायिक कदाचार’ (Professional Misconduct) माना जाएगा।
  2. रजिस्ट्रेशन पर खतरा: नियम का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
  3. जागरूकता: मरीजों के परिजनों को सलाह दी गई है कि वे विज्ञापनों के झांसे में न आएं और केवल स्वीकृत उपचार पद्धतियों का ही पालन करें।

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