बिहार की सांस्कृतिक राजधानी और मिथिलांचल का केंद्र ‘दरभंगा’ अब विकास के नए आसमान को छू रहा है। बिहार में विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) की बढ़ती मांग और बेहतर होती हवाई कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा प्रमाण दरभंगा एयरपोर्ट (@aaidarairport) बनकर उभरा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, यात्री आवागमन में 57.1% की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है, जो न केवल उत्तर बिहार बल्कि पूरे राज्य के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है।
संकल्प से सिद्धि: 8 नवंबर 2020 को शुरू हुआ था सफर
दरभंगा में व्यावसायिक हवाई सेवा की शुरुआत 8 नवंबर 2020 को हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी ‘उड़ान’ (UDAN – उड़े देश का आम नागरिक) योजना के तहत सेना के इस पुराने एयरबेस को सिविल एन्क्लेव में तब्दील किया गया। शुरुआत में कई चुनौतियों के बावजूद, मिथिला के लोगों ने इस सेवा को हाथों-हाथ लिया और देखते ही देखते यह एयरपोर्ट देश के सबसे सफल ‘उड़ान’ एयरपोर्ट्स की सूची में शामिल हो गया।
उड़ानों का जाल और महानगरों से जुड़ाव
वर्तमान में दरभंगा एयरपोर्ट से रोजाना औसतन 10 से 15 उड़ानों का संचालन होता है। यहाँ से देश के प्रमुख महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और हैदराबाद के लिए सीधी हवाई सेवा उपलब्ध है। इन शहरों के लिए सीधी फ्लाइट्स होने से न केवल आम यात्रियों को सुविधा हुई है, बल्कि मिथिला के मखाना उद्योग, मिथिला पेंटिंग और स्थानीय व्यापार को भी वैश्विक बाजार तक पहुँचने का नया रास्ता मिला है।
प्रगतिशील बिहार की नई पहचान
यात्री संख्या में आई 57.1% की उछाल यह स्पष्ट करती है कि दरभंगा एयरपोर्ट केवल एक परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति का इंजन बन गया है। उत्तर बिहार के 10 से अधिक जिलों और पड़ोसी देश नेपाल के तराई क्षेत्रों के लिए यह एयरपोर्ट एक ‘लाइफलाइन’ साबित हो रहा है। बेहतर हवाई संपर्कता ने यहाँ पर्यटन की संभावनाओं को भी नई गति दी है।
भविष्य की राह
हवाई अड्डे के विस्तार और बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ, आने वाले समय में यहाँ से उड़ानों की संख्या और गंतव्य शहरों की सूची और भी लंबी होने की उम्मीद है। दरभंगा एयरपोर्ट की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही बुनियादी ढांचा मिले, तो बिहार का विकास बुलेट की रफ्तार से आगे बढ़ सकता है।

