राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग कर एनडीए (NDA) उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने वाले कांग्रेस के तीन बागी विधायकों की मुश्किलें बढ़ना तय है। पार्टी द्वारा जारी ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) का जवाब देते हुए इन विधायकों ने अपनी गलती मानने के बजाय प्रदेश नेतृत्व पर ही तीखा हमला बोला है। कांग्रेस मुख्यालय को भेजे गए जवाब के बाद अब पार्टी आलाकमान इन पर निष्कासन जैसी कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
क्या है पूरा विवाद?
हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के तीन विधायकों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। इस बगावत के बाद पार्टी ने उन्हें अनुशासनहीनता का दोषी मानते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया था और दो दिन के भीतर जवाब मांगा था।
जवाब में पलटवार: नेतृत्व पर ही फोड़ा ठीकरा
सूत्रों के अनुसार, बागी विधायकों ने अपने जवाब में अपनी बगावत को जायज ठहराने की कोशिश की है।
• नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया: विधायकों ने अपनी प्रतिक्रिया में साफ कहा है कि राज्य में व्याप्त ‘गड़बड़ी’ और असंतोष के लिए प्रदेश नेतृत्व ही पूरी तरह जिम्मेदार है।
• गलती मानने से इनकार: अपनी ही पार्टी के खिलाफ जाने के बावजूद इन विधायकों ने अपनी गलती नहीं मानी है, जिससे पार्टी आलाकमान के बीच नाराजगी और बढ़ गई है।
कार्रवाई की तैयारी: आलाकमान के पाले में गेंद
विधायकों के इस अड़ियल रुख के बाद अब फैसला कांग्रेस हाईकमान (आलाकमान) के पास सुरक्षित है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि:
- इन विधायकों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया जा सकता है।
- विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से इनकी सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया तेज की जा सकती है।
- भविष्य के लिए पार्टी के सभी पदों से इन्हें बेदखल किया जा सकता है।
सरकार पर संकट या पार्टी की मजबूती?
इस बगावत ने न केवल पार्टी की आंतरिक गुटबाजी को उजागर किया है, बल्कि राज्य सरकार के अस्तित्व पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि पार्टी अनुशासन से समझौता नहीं करेगी और गद्दारों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

