बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार, भाजपा ने केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बिहार का सेंट्रल ऑब्जर्वर (केंद्रीय पर्यवेक्षक) नियुक्त किया है। यह फैसला राज्य की सत्ता में होने वाले संभावित फेरबदल को देखते हुए लिया गया है।
नीतीश कुमार का इस्तीफा और नई जिम्मेदारी
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 14 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। माना जा रहा है कि 13 अप्रैल को ‘खरमास’ (एक हिंदू महीना जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है) समाप्त होने के बाद वे यह बड़ा कदम उठाएंगे।
नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं और उन्होंने 10 अप्रैल को उच्च सदन के सदस्य के रूप में शपथ भी ले ली है। उनके केंद्र की राजनीति में जाने के फैसले के बाद बिहार में ‘नए मुख्यमंत्री’ की तलाश शुरू हो गई है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इस महत्वपूर्ण चयन प्रक्रिया की जिम्मेदारी शिवराज सिंह चौहान को सौंपी है, जो पटना पहुंचकर विधायक दल की बैठक में नए नेता के नाम पर मुहर लगवाएंगे।
शिवराज सिंह चौहान: ‘पांव-पांव वाले भैया’ से ‘केंद्रीय मंत्री’ तक का सफर
शिवराज सिंह चौहान, जिन्हें मध्य प्रदेश में प्यार से ‘मामा’ कहा जाता है, भारतीय राजनीति के उन गिने-चुने नेताओं में से हैं जिनकी छवि बेहद सरल और जमीन से जुड़ी रही है।
- शुरुआती दौर: 5 मार्च 1959 को जन्मे शिवराज ने 1970 के दशक में एबीवीपी (ABVP) के माध्यम से राजनीति में कदम रखा। आपातकाल के दौरान वे जेल भी गए।
- संसदीय सफर: वे 1991 में पहली बार विदिशा से सांसद चुने गए और लगातार पांच बार लोकसभा पहुंचे।
- मुख्यमंत्री के रूप में रिकॉर्ड: 2005 में उन्होंने पहली बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान संभाली। वे मध्य प्रदेश के सबसे लंबे समय तक रहने वाले मुख्यमंत्री बने। उनकी ‘लाडली लक्ष्मी’ और ‘लाडली बहना’ जैसी योजनाओं ने उन्हें महिला मतदाताओं के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया।
- वर्तमान भूमिका: 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद, उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
अब बिहार के इस राजनीतिक संकट में शिवराज सिंह चौहान की भूमिका ‘ट्रबलशूटर’ के रूप में देखी जा रही है। उनकी देखरेख में ही तय होगा कि बिहार की कमान अब किसके हाथों में होगी। क्या भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाएगी या गठबंधन का कोई नया चेहरा सामने आएगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

