Indo-Nepal Border Rules: इंडो-नेपाल बॉर्डर पर सख्ती! भारत से 100 रुपये से अधिक की खरीदारी पर देना होगा भंसार, क्यों बदली नेपाल की नीति?

अररिया। न्यूजस्टिच
भारत-नेपाल सीमा पर दशकों से चली आ रही परंपरा अब इतिहास बनने की कगार पर है। नेपाल की नई सरकार ने सीमावर्ती इलाकों के छोटे व्यापार और निजी खरीदारी को लेकर एक ऐसा नियम लागू किया है। जिसने जोगबनी, अररिया, किशनगंज और सुपौल जैसे सीमावर्ती जिलों के लाखों लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब यदि कोई नेपाली नागरिक या पर्यटक भारत से 100 रुपये से अधिक का कोई भी सामान ले जाता है, तो उसे नेपाल प्रवेश करते ही भंसार यानी सीमा शुल्क चुकाना होगा।

महज 24 घंटे में दिखी सख्ती: 15 लाख के कपड़े जब्त
यह नियम सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है। इसकी जमीनी हकीकत नियम लागू होने के पहले 24 घंटों में ही साफ हो गई। जोगबनी-विराटनगर नाका पर नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (APF) ने सघन तलाशी अभियान चलाते हुए करीब 15 लाख रुपये से अधिक के कपड़े जब्त किए। सुरक्षाकर्मियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि नियमों का उल्लंघन करने पर सामान न केवल रोका जाए, बल्कि उसे तत्काल प्रभाव से जब्त कर लिया जाए।

सीमा पर 2200 जवानों का पहरा: तस्करी या आम जन पर प्रहार?
नेपाल सरकार ने इस फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए अररिया, सुपौल और किशनगंज से सटी सीमाओं पर सुरक्षा का ‘घेरा’ और सख्त कर दिया है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर नेपाल आर्म्स पुलिस फोर्स ने करीब 2200 अतिरिक्त जवानों को सीमा पर तैनात किया है। इन जवानों को बटालियन और रेजिमेंट से निकाल कर सीधे पेट्रोलिंग ड्यूटी पर लगाया गया है। सरकार का तर्क है कि इससे तस्करी, नशा और हथियारों की अवैध आवाजाही पर लगाम लगेगी। लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि 100 रुपये की सीमा तय करना छोटे दुकानदारों और आम घरेलू खरीदारों के लिए किसी प्रहार से कम नहीं है।

क्यों बदली नेपाल की नीति?
विराटनगर में आयोजित मोरंग उद्योग व्यापार संगठन की बैठक में इस बदलाव की नींव रखी गई। नेपाल के अर्थ सचिव और भंसार विभाग के महानिदेशकों का मानना है कि सीमा से होने वाली अनियंत्रित खरीदारी नेपाल की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही है। नेपाल स्थित मोरंग के सीडीओ युवराज कटेल के अनुसार, नई प्रशासनिक व्यवस्था के तहत आर्थिक अनुशासन को प्राथमिकता दी जा रही है।

बेटी-रोटी के रिश्तों पर असर की आशंका
भारत और नेपाल के सीमावर्ती गांवों में आपसी रिश्ते इतने गहरे हैं कि लोग रोजमर्रा के सामान, जैसे नमक, तेल या कपड़े खरीदने के लिए सरहद पार करते रहते हैं। 100 रुपये की न्यूनतम सीमा (जो कि आज के समय में नगण्य है) तय करने से इन सामाजिक रिश्तों में खटास आने की आशंका जताई जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि इतने कड़े नियमों से सीमावर्ती छोटे बाजारों की रौनक गायब हो सकती है।

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