गोपालगंज। न्यूजस्टिच
गोपालगंज के फुलवरिया प्रखंड स्थित राधागंज के प्राचीन श्री राधे-कृष्ण मठ के पूज्य महंत और प्रख्यात संत पदम दास जी महाराज (गेना दास जी महाराज) शनिवार की देर रात ब्रह्मलीन हो गए। अचानक हृदय गति रुक जाने के कारण हुए उनके देहावसान की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके अंतिम दर्शन के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं और संतों का सैलाब उमड़ पड़ा है।
मानवता और धर्म के प्रति समर्पित जीवन
मूल रूप से कटेया थाना क्षेत्र के कंचनपुर निवासी पदम दास जी महाराज ने बाल्यावस्था में ही सांसारिक मोह-माया का त्याग कर दिया था। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, जन कल्याण और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित कर दिया। वे न केवल एक आध्यात्मिक गुरु थे, बल्कि उन्होंने नटवा, बरवा, बनकटा मठ और इटवा धाम जैसे प्रतिष्ठित स्थानों पर साधना कर हजारों लोगों को जीवन की नई दिशा दिखाई।
समाज कल्याण के लिए ऐतिहासिक कार्य: झरही नदी पर बनवाया पुल
संत पदम दास जी महाराज की पहचान केवल मंदिर तक सीमित नहीं थी। उनकी सेवा भावना का सबसे बड़ा प्रमाण झरही नदी पर बना पुल है। पंचदेवरी और कुचायकोट के लोगों की परेशानी को देखते हुए उन्होंने 8 वर्षों तक संघर्ष किया और करीब 1 करोड़ रुपये की लागत से जनसहयोग (अर्थदान व श्रमदान) के माध्यम से 2017 में पुल का निर्माण पूरा कराया।
जीर्णोद्धार और महायज्ञों के प्रणेता
उन्होंने राधागंज स्थित खंडहर हो चुके प्राचीन श्री राधे-कृष्ण मंदिर का कायाकल्प किया और इसे नया जीवन दिया। इसके अलावा, 2019 में महरादेउर में उनके द्वारा कराया गया ऐतिहासिक महायज्ञ पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय रहा था।
कल दी जाएगी समाधि
महाराज जी की अंतिम यात्रा सोमवार की सुबह 9:00 बजे निकाली जाएगी, जिसके बाद उन्हें पूरे विधि-विधान के साथ समाधि दी जाएगी। उनके अंतिम दर्शन के लिए बिहार के अलावा अन्य राज्यों से भी उनके शिष्यों के पहुंचने की संभावना है।

