पटना। न्यूजस्टिच
बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का दिल्ली दौरा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ उनकी लंबी मुलाकात महज एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि बिहार में नई सरकार की ‘स्क्रिप्ट’ का फाइनल ड्राफ्ट है। इस बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार होगा, जिसमें न केवल नए चेहरे दिखेंगे, बल्कि सामाजिक समीकरणों को भी नए सिरे से साधने की कोशिश की जाएगी।
एचएम अमित शाह के साथ ‘पॉवर गेम’ पर चर्चा
सम्राट चौधरी ने शनिवार को बिहार बीजेपी प्रभारी विनोद तावड़े से मुलाकात की और उसके बाद एचएम अमित शाह के साथ मंत्रिमंडल के स्वरूप पर चर्चा की। सूत्रों की मानें तो इस बैठक में उन नामों पर मुहर लग चुकी है, जो आने वाले समय में नीतीश कैबिनेट का हिस्सा होंगे। बीजेपी इस बार संख्या बल और प्रभाव, दोनों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। पिछली कैबिनेट में बीजेपी के 14 मंत्री थे, लेकिन नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद यह संख्या 13 पर आ गई थी। अब बीजेपी कोटे से मंत्रियों की संख्या बढ़ाकर 16 करने की योजना है, जिसका मतलब है कि तीन नए चेहरे कैबिनेट का हिस्सा बनेंगे।
क्या बदले जाएंगे पुराने चेहरे?
पॉलिटिकल गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या पुराने मंत्रियों की छुट्टी होगी? सूत्रों के मुताबिक, हाईकमान कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं है। ऐसे में ‘नॉन-परफॉर्मिंग’ मंत्रियों को हटाकर नए युवाओं और महिला चेहरों को मौका दिया जा सकता है। इसके अलावा, पूर्व डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की भूमिका को लेकर भी सस्पेंस बना हुआ है। चर्चा है कि उन्हें कोई भारी-भरकम और प्रभावशाली मंत्रालय दिया जा सकता है, ताकि सरकार में बीजेपी का रसूख बना रहे।
सामाजिक समीकरण: 2025 विधानसभा पर नजर
बीजेपी का यह कैबिनेट विस्तार केवल रिक्तियों को भरने के लिए नहीं है, बल्कि 2025 के विधानसभा चुनाव के लिए ‘बिसात’ बिछाने जैसा है। मंत्रिमंडल में सवर्ण, दलित और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हो रही है। सम्राट चौधरी खुद कुशवाहा समाज से आते हैं, ऐसे में पार्टी अन्य पिछड़ी जातियों को कैबिनेट में तवज्जो देकर एक बड़ा संदेश देना चाहती है।
4 मई के बाद ‘पर्दा’ उठेगा
कैबिनेट विस्तार की समय सीमा भी तय मानी जा रही है। कल, यानी 4 मई को पांच राज्यों के चुनाव परिणामों की मतगणना है। जैसे ही चुनाव के नतीजे सामने आएंगे, बिहार में मंत्रियों के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मुख्यमंत्री के दिल्ली से लौटते ही राजभवन को संभावित मंत्रियों की सूची भेज दी जाएगी। कुल मिलाकर, सम्राट चौधरी का दिल्ली दौरा यह साफ कर गया है कि बिहार में बीजेपी अब ‘जूनियर पार्टनर’ की भूमिका से निकलकर सरकार चलाने में अपना दबदबा चाहती है। नए विभागों के बंटवारे और नए मंत्रियों के चयन में अमित शाह की मुहर इसी बदली हुई रणनीति का हिस्सा है।

