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बिहार मौसम अपडेट: सावधान! अगले 14 दिनों तक आसमानी बिजली और आंधी का अलर्ट, जानें आपके जिले में कब होगी बारिश

बिहार में मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट लेने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना ने 1 मई से 14 मई 2026 तक के लिए विस्तृत पूर्वानुमान जारी करते हुए पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी किया है। अगले दो हफ्तों के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ-साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और वज्रपात (बिजली गिरने) की प्रबल संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, मई के पहले सप्ताह में बिहार के अधिकांश जिलों में एक या दो स्थानों पर मेघ गर्जन के साथ बारिश हो सकती है। विशेष रूप से उत्तर बिहार, दक्षिण-मध्य और दक्षिण-पूर्व भाग के जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा होने का अनुमान है। इस दौरान तापमान में भी गिरावट दर्ज की जाएगी। अधिकतम तापमान 32°C से 36°C के बीच रहने की संभावना है, जो सामान्य से कम रहेगा। रात का पारा यानी न्यूनतम तापमान भी 21°C से 23°C के आसपास बना रहेगा।

मई के दूसरे सप्ताह में उत्तर बिहार के जिलों में सक्रियता अधिक रहेगी। यहाँ अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और वज्रपात की चेतावनी दी गई है। हालांकि, राज्य के शेष हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रह सकता है और बारिश सामान्य से कम होने के आसार हैं। इस हफ्ते गर्मी थोड़ी बढ़ सकती है, जहां दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य बिहार में पारा 38°C तक पहुंच सकता है।

बदलते मौसम को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों और मौसम विभाग ने किसानों को खास हिदायत दी है:

  • फसल सुरक्षा: कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर तुरंत पहुंचाएं। खड़ी फसलों में सिंचाई और कीटनाशक का छिड़काव मौसम साफ होने पर ही करें।
  • मूंग और मक्का: गरमा मूंग और उरद में कीटों (सघन रोमोवाली सुंडिया) की निगरानी करें और आवश्यकतानुसार मिथाइल पैराथियान या क्लोरपाईरिफॉस का छिड़काव करें। मक्का की फसल में मिट्टी चढ़ाने और यूरिया के उपरीवेशन का कार्य पूरा करें।
  • बागवानी: आम के बागों में नमी बनाए रखें और मिलीबग (दहिया कीट) से बचाव के लिए छिड़काव करें। टिकोला बनने के बाद फलों के बेहतर विकास के लिए NPK, जिंक और बोरान का संतुलित घोल डालें।

मौसम विभाग ने वज्रपात के खतरे को देखते हुए लोगों से आग्रह किया है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। सुरक्षित आश्रय के लिए पक्के मकानों का सहारा लें। किसानों और पशुपालकों को सटीक जानकारी के लिए ‘मेघदूत’ और ‘दामिनी’ ऐप का उपयोग करने की सलाह दी गई है। पशुओं को पेड़ों के नीचे न बांधें और उन्हें स्वच्छ पानी पिलाएं।

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