पटना। न्यूजस्टिच
बिहार की सियासत में इन दिनों उम्र और विरासत को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी और बिहार सरकार के कद्दावर मंत्री डॉ.अशोक चौधरी द्वारा अपने भाई निशांत कुमार की जन्मतिथि को लेकर फेसबुक पर किए गए एक पोस्ट ने राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज कर दी है। जहां मंत्री जी इसे तथ्यात्मक सुधार बता रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया यूजर्स और विपक्षी समर्थक इसे सियासी लॉन्चिंग की तैयारी के रूप में देख रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
डॉ.अशोक चौधरी ने फेसबुक पर एक महत्वपूर्ण सूचना साझा करते हुए स्पष्ट किया कि उनके भाई निशांत कुमार की सही जन्मतिथि 20 जुलाई 1981 है और उनकी वर्तमान आयु 44 वर्ष है। उन्होंने मीडिया घरानों से अनुरोध किया कि भविष्य में इसी जानकारी का उपयोग करें। अमूमन किसी नेता के भाई की उम्र को लेकर इस तरह का आधिकारिक स्पष्टीकरण आना राजनीति में विरल है। यही कारण है कि इस पोस्ट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है।
सोशल मीडिया पर सर्जिकल स्ट्राइक
मंत्री जी के इस पोस्ट पर यूजर्स ने तीखे कटाक्ष किए हैं। अभिजीत मिश्रा नामक यूजर ने सीधे तौर पर इसे मुख्यमंत्री से जोड़ते हुए लिखा कि जब तक अमित अंकल (नीतीश कुमार) नहीं कहेंगे, तब तक हम मानबे नहीं करेंगे। यह टिप्पणी उस राजनीतिक धारणा की ओर इशारा करती है जिसमें माना जा रहा है कि सत्ता के शीर्ष स्तर से ही किसी नए चेहरे को आगे बढ़ाने की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है।
वहीं सुभम सौरव ने इसे विरासत की राजनीति पर हमला बताते हुए लिखा कि बिहार की जनता पर काबिल और पढ़े-लिखे युवाओं के बावजूद किसी को ‘थोप’ दिया जाता है। देशभक्त मनीष और सुमित सराफ जैसे यूजर्स ने कानूनी और तकनीकी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि महज फेसबुक पोस्ट से काम नहीं चलेगा, इसके लिए एफिडेविट (हलफनामा) या सर्टिफिकेट जैसे साक्ष्य सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

सियासी चश्मे से इसके मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. अशोक चौधरी का यह स्पष्टीकरण महज एक डेटा सुधार नहीं है। इसके पीछे कई गहरे संकेत छिपे हो सकते हैं। भावी चुनावी तैयारी 44 वर्ष की आयु स्पष्ट करना इस बात का संकेत हो सकता है कि निशांत कुमार को आने वाले समय में किसी चुनावी रण में उतारा जा सकता है, जिसके लिए तकनीकी रूप से कागजात दुरुस्त किए जा रहे हैं। विरासत का विस्तार अशोक चौधरी खुद बिहार की राजनीति के बड़े खिलाड़ी हैं। अपने परिवार के किसी अन्य सदस्य की ‘आयु’ को लेकर मीडिया को निर्देशित करना उनके बढ़ते सियासी रसूख और भविष्य की योजना की ओर इशारा करता है।
विपक्ष को मौका
कुशुवाहा मनोज मंडल जैसे यूजर्स ने इसे डिग्री विवाद से जोड़कर सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। विपक्ष इसे मुद्दा बना सकता है कि जब राज्य में बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दे हैं, तब सरकार के मंत्री उम्र के प्रमाण पत्र बांटने में व्यस्त हैं। फिलहाल, डॉ.अशोक चौधरी के इस एक पोस्ट ने बिहार की राजनीति में ‘निशांत कुमार’ नाम के इर्द-गिर्द नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। देखना यह होगा कि क्या यह स्पष्टीकरण विवादों को थामता है या किसी नए सियासी ड्रामे की शुरुआत करता है।

