पूर्वी बिहार को दक्षिण बिहार और सीमांचल से जोड़ने वाला एकमात्र महत्वपूर्ण मार्ग, विक्रमशिला सेतु, आज एक बड़े हादसे का शिकार हो गया। सेतु का पाया नंबर (पिलर) 133 पूरी तरह ध्वस्त हो गया है, जिसके बाद सुरक्षा कारणों से पुल पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँच चुके हैं।

चेतावनी के बावजूद नहीं जागा विभाग
हैरानी की बात यह है कि पिलर संख्या 133 में खराबी की शिकायत पिछले कई दिनों से की जा रही थी। स्थानीय मीडिया द्वारा लगातार खबर दिखाए जाने और विभाग को सचेत करने के बावजूद मरम्मत का कार्य शुरू नहीं किया गया। प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा आज पुल के इस हिस्से के ढहने के रूप में सामने आया है। यदि समय रहते पिलर के आधार को मजबूत किया जाता, तो शायद इस बड़े संकट से बचा जा सकता था।
पुल का इतिहास और निर्माण
विक्रमशिला सेतु का निर्माण भागलपुर में गंगा नदी पर यातायात सुगम करने के लिए किया गया था।
- उद्घाटन: इस पुल का उद्घाटन वर्ष 2001 में किया गया था।
- लागत: उस समय इस महासेतु को बनाने में लगभग 160 करोड़ रुपये की लागत आई थी।
- महत्व: यह पुल न केवल भागलपुर बल्कि पूर्णिया, कटिहार, अररिया और नवगछिया को झारखंड व बंगाल से जोड़ने वाला प्रमुख केंद्र है।
मौके पर स्थिति
वर्तमान में पुल पर आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है ताकि किसी जान-माल का नुकसान न हो। डीएम ने तकनीकी टीम को मौके पर बुलाया है और जांच के आदेश दिए हैं। स्थानीय लोगों में विभाग के प्रति भारी आक्रोश है क्योंकि यह पुल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।

