पटना। न्यूजस्टिच
बिहार सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए सरकारी सेवाओं की गति और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब राज्य के सभी जिलों को मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने की दैनिक रिपोर्ट नियमित रूप से पंचायती राज विभाग को भेजनी होगी. सरकार की इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ निश्चय के तहत नागरिकों को दी जाने वाली सुविधाओं को सुगम बनाना है.
जवाबदेही तय: 24 घंटे का ‘डेडलाइन’
नई गाइडलाइंस के अनुसार, पंचायतों के मोक्षधाम (श्मशान घाट) और कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार होने के मात्र 24 घंटे के भीतर संबंधित परिवार को मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस कार्य में किसी भी स्तर पर देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट विभाग को नहीं भेजी गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तुरंत शो-कॉज (कारण बताओ नोटिस) जारी किया जाएगा. इसके साथ ही, इस प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की सीधी जवाबदेही भी तय की गई है.
पंचायती राज विभाग की कड़ी निगरानी
विभाग अब नियमित तौर पर जिलों से मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने की प्रगति रिपोर्ट प्राप्त करेगा. इस मॉनिटरिंग सिस्टम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी शोक संतप्त परिवार को प्रमाण पत्र के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। सरकार का मानना है कि अंतिम संस्कार के तुरंत बाद यह दस्तावेज मिलने से उत्तराधिकार और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में आने वाली बाधाएं दूर होंगी।
सोलर स्ट्रीट लाइट एजेंसियों पर भी गाज
मृत्यु प्रमाण पत्र के अलावा, सरकार ने बुनियादी ढांचा योजनाओं की भी समीक्षा की है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली सोलर स्ट्रीट लाइट योजना में लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों के खिलाफ विभाग ने सख्त रुख अपनाया है. कार्य में ढिलाई और गुणवत्ता से समझौता करने वाली ऐसी कई एजेंसियों से विभाग ने शो-कॉज किया है. सरकार के इन सख्त कदमों से प्रशासन में हड़कंप मच गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि समय सीमा के भीतर प्रमाण पत्र मिलने और विकास कार्यों की नियमित निगरानी से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं की स्थिति में बड़ा सुधार आएगा।

