पटना। न्यूजस्टिच
बिहार की राजधानी के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक संजय गांधी जैविक उद्यान का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर पटना जू कर दिया गया है। राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए इसके संचालन के लिए जिम्मेदार संजय गांधी जैविक उद्यान प्रबंधन एवं विकास सोसाइटी का नाम भी बदलकर पटना जू प्रबंधन एवं विकास सोसाइटी कर दिया है। जहां एक ओर सरकार इसे पहचान और सरलीकरण से जोड़कर देख रही है। वहीं इस फैसले ने राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे महापुरुषों के अपमान और नाम बदलने की राजनीति करार दिया है।
मुख्यमंत्री अपने क्षेत्र में नया जू बनवाते: कांग्रेस
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व की कांग्रेस सरकार ने संयुक्त बिहार को उसके पहले चिड़ियाघर के रूप में यह सौगात दी थी। हमें गर्व है कि हमने संयुक्त बिहार का पहला जू संजय गांधी जैविक उद्यान के रूप में दिया था। आज भाजपा और सत्तासीन दल संजय गांधी का नाम मिटाने में लगे हैं। नाम बदलने से बेहतर होता कि मुख्यमंत्री अपने क्षेत्र में एक नया चिड़ियाघर बनवाते। तिवारी ने आगे कहा कि यदि सरकार को नाम ही रखना था, तो वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर कोई नया उद्यान या चिड़ियाघर बनवाते, तो वह ज्यादा सराहनीय कदम होता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बुनियादी विकास करने के बजाय सिर्फ पुरानी धरोहरों के नाम बदलने में अपनी ऊर्जा खर्च कर रही है।
पर्यटन और पहचान का तर्क
गौरतलब है कि संजय गांधी जैविक उद्यान को आम बोलचाल की भाषा में पहले से ही ‘पटना जू’ कहा जाता रहा है। प्रशासन का तर्क है कि इस बदलाव से पर्यटकों के बीच भ्रम की स्थिति खत्म होगी और इसकी वैश्विक पहचान और अधिक सुदृढ़ होगी। हालांकि, नाम बदलने की इस कवायद ने आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग को और तेज कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस विरोध पर क्या रुख अपनाती है और क्या यह बदलाव जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता बना पाता है।
पटना जू (संजय गांधी जैविक उद्यान) बिहार का न केवल सबसे बड़ा चिड़ियाघर है, बल्कि यह अपनी खासियतों के कारण देश के शीर्ष चिड़ियाघरों में गिना जाता है। इसकी स्थापना 1969 में एक ‘वनस्पति उद्यान’ (Botanical Garden) के रूप में हुई थी। तत्कालीन राज्यपाल श्री नित्यानंद कानूनगो ने राजभवन परिसर से लगभग 34 एकड़ भूमि इसके लिए उपलब्ध कराई थी। चिड़ियाघर के रूप में विस्तार 1973 में हुआ। जब वर्ष 1972 में अन्य विभागों से भूमि मिलने के बाद इसका क्षेत्रफल बढ़ा और 1973 में इसे आधिकारिक तौर पर एक चिड़ियाघर के रूप में आम जनता के लिए खोल दिया गया। 1980 में इसका नाम बदलकर ‘संजय गांधी जैविक उद्यान’ रखा गया था।
पटना जू की प्रमुख खासियतें
गैंडा प्रजनन में विश्व स्तर पर पहचान
पटना जू की सबसे बड़ी खासियत यहाँ का गेंडा प्रजनन केंद्र (Rhino Breeding Center) है। यह दुनिया के उन चुनिंदा चिड़ियाघरों में से एक है जहाँ एक सींग वाले गैंडों का सफलतापूर्वक प्रजनन कराया जाता है। गैंडों की संख्या के मामले में यह दुनिया में दूसरे या तीसरे स्थान पर आता है, जो बिहार के लिए गर्व की बात है।
वनस्पति और जीव-जंतुओं का संगम
यह केवल एक चिड़ियाघर नहीं, बल्कि एक ‘जैविक उद्यान’ है। यहाँ 300 से अधिक प्रजातियों के हजारों पेड़-पौधे मौजूद हैं। यहां एक विशेष ‘धन्वंतरि उद्यान’ है जहाँ जड़ी-बूटियों और औषधीय पौधों का संग्रह है। रोज गार्डन और ग्रीन हाउस। यहां गुलाबों की कई किस्में और दुर्लभ इंडोर प्लांट्स देखे जा सकते हैं।
वन्यजीवों की विविधता
यहां लगभग 100 से अधिक प्रजातियों के 800 से ज्यादा जीव-जंतु रहते हैं। इनमें मुख्य आकर्षण रॉयल बंगाल टाइगर और सफेद बाघ। अफ्रीकी जिराफ, जेब्रा और चिंपांजी। विशालकाय हिप्पोपोटेमस (दरियाई घोड़ा)। अन्य प्रमुख आकर्षण में एक्वेरियम (मछली घर) है। इसमें मछलियों की लगभग 35 से ज्यादा प्रजातियां हैं। स्नेक हाउस (सर्प घर)। यहां दुर्लभ प्रजातियों के सांप और अजगर रखे गए हैं। टॉय ट्रेन और बोटिंग। बच्चों के लिए टॉय ट्रेन और झील में बोटिंग की सुविधा इसे एक बेहतरीन पिकनिक स्पॉट बनाती है। नेचर लाइब्रेरी प्रकृति प्रेमियों के लिए यहाँ एक विशेष लाइब्रेरी भी है जहाँ वन्यजीवों से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। अपनी इन विशेषताओं के कारण ही पटना जू हर साल लाखों पर्यटकों (खासकर 1 जनवरी को रिकॉर्ड संख्या में) को अपनी ओर आकर्षित करता है।

