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LPG के संकट के बीच बिहार सरकार का बड़ा फैसला! अब राशन दुकानों पर मिलेगा कुकिंग कोयला, जानें पूरी योजना

दक्षिण पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण युद्ध का असर अब बिहार की रसोइयों तक पहुँच गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा सप्लाई चेन बाधित होने के कारण राज्य में एलपीजी (LPG) गैस की भारी किल्लत पैदा हो गई है। इस आपात स्थिति से निपटने के लिए बिहार सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब राज्य के राशन कार्ड धारकों को जन वितरण प्रणाली (PDS) की दुकानों के माध्यम से कुकिंग कोयला (Cooking Coal) उपलब्ध कराया जाएगा।

खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह द्वारा जारी पत्र (पत्रांक-प्र07, कोयला आपूर्ति-05/2026-1925) के अनुसार, वर्तमान युद्ध की स्थिति ने रसोई गैस की उपलब्धता पर संकट खड़ा कर दिया है। इसके निवारण हेतु राज्य सरकार ने ‘आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005’ के प्रावधानों का उपयोग करते हुए कोयले को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में चुनने का निर्णय लिया है।

  • किसे मिलेगा लाभ: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत आने वाले सभी राशन कार्ड धारकों (लाभुक) को यह कुकिंग कोयला दिया जाएगा।
  • वितरण का माध्यम: कोयले की आपूर्ति और वितरण उन्हीं सरकारी गल्ले की दुकानों (PDS) से होगा जहाँ से वर्तमान में अनाज मिलता है।
  • विभागों को निर्देश: इस संबंध में खान एवं भूतत्व विभाग, परिवहन विभाग और सभी जिलाधिकारियों (DM) को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

सरकार का मानना है कि एलपीजी की कमी के कारण लोगों को खाना पकाने में समस्या न हो, इसलिए कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए बाकायदा एक मार्गदर्शिका (Guideline) तैयार की गई है, जिसके आलोक में जल्द ही जिलों में कोयले का स्टॉक भेजा जाएगा। परिवहन विभाग को इसके सुचारू परिवहन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जहाँ सरकार इसे एक ‘बैकअप प्लान’ के रूप में देख रही है, वहीं जानकारों का मानना है कि दशकों बाद फिर से कोयले पर निर्भरता पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकती है। हालांकि, मौजूदा वैश्विक संकट में आम जनता को भूखा न रहना पड़े, इसके लिए सरकार इसे एक अनिवार्य कदम बता रही है।

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