गोपालगंज। न्यूजस्टिच
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग की आग अब बिहार के आंगन तक पहुंच गई है। गोपालगंज जिले के कम से कम 12 श्रमिकों के युद्ध प्रभावित इलाकों में लापता होने की खबर से हड़कंप मच गया है। इन श्रमिकों का अपने परिजनों से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है, जिसके बाद पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन और केंद्र सरकार से सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई है।
लेबनान में फंसा सोनू, परिवार की थमी सांसें
मांझा प्रखंड के देवापुर जाफर टोला निवासी महफूज आलम का पुत्र मुस्ताक उर्फ सोनू आलम पिछले दो वर्षों से लेबनान में रोजी-रोटी कमा रहा था। परिजनों के अनुसार क्षेत्र में बढ़ते हवाई हमलों और जमीनी तनाव के बीच सोनू पिछले कई दिनों से संपर्क में नहीं है। सोनू की मां शमीमा खातून और दादा रबुद्दीन मियां का रो-रोकर बुरा हाल है। सोनू के चाचा कामील आलम ने बताया कि गांव का ही एक अन्य युवक इमामुल आलम उसके साथ गया था, जो खुशनसीबी से वापस लौट आया है, लेकिन सोनू अब भी वहीं फंसा हुआ है। घर में दिन-रात बस उसकी सलामती की दुआएं मांगी जा रही हैं।
एजेंटों की धोखाधड़ी और इमामुल की घर वापसी
एक ओर जहां सोनू के घर में मातम जैसा सन्नाटा है। वहीं देवापुर पुरदिल टोला के इमामुल साह की सकुशल वापसी ने उम्मीद की किरण जगाई है। इमामुल के चाचा हैदर अली ने आरोप लगाया कि एजेंट ने उसे दुबई भेजने के नाम पर तनावग्रस्त इलाके में भेज दिया था। हालांकि परिजनों द्वारा गोपालगंज डीएम और विदेश मंत्रालय को लिखे गए पत्रों और प्रशासनिक सक्रियता के बाद इमामुल को सुरक्षित वापस बुला लिया गया है। उसकी मां सबरून नेशा ने प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि उनके बेटे का घर लौटना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
प्रशासनिक सक्रियता और सरकारी पहल
गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए पुष्टि की है कि जिले के करीब 12 श्रमिक वर्तमान में युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फंसे या लापता हैं। लापता श्रमिकों की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय को सूची भेज दी गई है। ऑपरेशन अजय जैसी पहलों के तहत श्रमिकों को निकालने का प्रयास जारी है।

