पटना। न्यूजस्टिच
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली प्रचंड जीत के बाद अब एनडीए (NDA) की नजरें राज्यसभा की पांच सीटों पर टिकी हैं। एनडीए जहां सभी पांचों सीटों पर कब्जा जमाकर क्लीन स्वीप की तैयारी में है, वहीं महागठबंधन (MGB) ‘पॉलिटिकल स्ट्राइक’ के जरिए एनडीए का खेल बिगाड़ने की फिराक में है। इस चुनाव ने न केवल सत्ता और विपक्ष, बल्कि एनडीए के भीतर भी भविष्य के नेतृत्व की चर्चाओं को हवा दे दी है।
NDA के चार नाम फाइनल, पांचवीं सीट पर सस्पेंस
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए एनडीए ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछा दी है। भाजपा ने अपने कोटे से प्रदेश महामंत्री शिवेश कुमार राम और कद्दावर नेता नितिन नवीन के नाम पर मुहर लगा दी है। वहीं, जदयू की ओर से रामनाथ ठाकुर का दोबारा जाना तय हो चुका है। गठबंधन के चौथे उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा का नाम भी फाइनल है। अब पूरी लड़ाई पांचवीं सीट को लेकर है, जहां ‘निशांत कुमार’ बनाम ‘तेजस्वी यादव’ की चर्चा जोरों पर है।
निशांत कुमार का पॉलिटिकल डेब्यू और जदयू का आंतरिक दबाव
जदयू के भीतर इन दिनों एक ही नाम की गूंज है निशांत कुमार। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को राजनीति में लाने के लिए जदयू के कई मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। दबी जुबान में शुरू हुआ यह समर्थन अब सार्वजनिक मांग बन चुका है। यदि निशांत कुमार को राज्यसभा भेजा जाता है, तो वे संभवतः हरिवंश नारायण सिंह की जगह लेंगे। हालांकि रेस में मुख्यमंत्री के करीबी और पूर्व नौकरशाह मनीष वर्मा का नाम भी मजबूती से बना हुआ है।
संख्या बल का गणित, भाजपा और जदयू की स्थिति मजबूत
बिहार विधानसभा 2025 के परिणामों के आधार पर राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। भाजपा 89 विधायकों के साथ भाजपा अपने दोनों उम्मीदवारों (नितिन नवीन और शिवेश राम) को आसानी से जिता लेगी। उनके पास कोटे से 7 वोट अतिरिक्त हैं। जदयू 85 विधायकों के साथ जदयू की दोनों सीटें भी सुरक्षित नजर आ रही हैं। पार्टी के पास 3 अतिरिक्त वोट बच रहे हैं।
असली मुकाबला उपेंद्र कुशवाहा बनाम तेजस्वी यादव?
सबसे दिलचस्प लड़ाई पांचवीं सीट को लेकर है। महागठबंधन से तेजस्वी यादव का नाम चर्चा में है, लेकिन गणित उनके पक्ष में थोड़ा कमजोर दिख रहा है। महागठबंधन का आंकड़ा राजद (25), कांग्रेस (06), लेफ्ट (03) और IIP (01) को मिलाकर यह संख्या 35 तक पहुंचती है। तेजस्वी को जीत के लिए 6 और विधायकों की जरूरत है। ऐसे में किंगमेकर की भूमिका में AIMIM (05 विधायक) और बसपा (01 विधायक) है। ये अगर महागठबंधन के साथ आ जाते हैं, तो तेजस्वी यादव बाजी मार सकते हैं।
चिराग पासवान और मांझी के हाथों में चाबी
एनडीए के कुल 202 विधायक हैं। पांचों सीटें जीतने के लिए एनडीए को 205 वोटों की जरूरत होगी (41 x 5 = 205)। यानी एनडीए अभी जादुई आंकड़े से 3 वोट दूर है। ऐसे में चिराग पासवान (19 विधायक) और जीतन राम मांझी (05 विधायक) की भूमिका निर्णायक हो गई है। यदि एनडीए में सब कुछ ठीक रहा, तो 202 के आंकड़े के साथ वे निर्दलीय या अन्य छोटे दलों के सहयोग से पांचवीं सीट निकाल सकते हैं। लेकिन यदि चिराग या मांझी ने अपनी कोई अलग शर्त रख दी, तो खेल पलट भी सकता है। यह चुनाव केवल राज्यसभा सीटों का नहीं, बल्कि 2025 के बाद बिहार की नई राजनीतिक दिशा का संकेत है। क्या नीतीश कुमार अपने बेटे को राजनीति में उतारकर उत्तराधिकार की लड़ाई खत्म करेंगे? क्या तेजस्वी यादव 6 विधायकों का जुगाड़ कर एनडीए के किले में सेंध लगा पाएंगे? इसका फैसला आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।
जानिए बिहार विधानसभा में सीटों की स्थिति
| गठबंधन | राजनीतिक दल | जीती गई सीटें |
| NDA (202) | भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 89 |
| जनता दल यूनाइटेड (JD-U) | 85 | |
| लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) | 19 | |
| हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM-S) | 05 | |
| राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) | 04 | |
| महागठबंधन (35) | राष्ट्रीय जनता दल (RJD) | 25 |
| कांग्रेस (INC) | 06 | |
| CPI (ML) (L) | 02 | |
| CPI (M) | 01 | |
| इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (IIP) | 01 | |
| अन्य (06) | AIMIM | 05 |
| बहुजन समाज पार्टी (BSP) | 01 | |
| कुल सीटें | 243 |

