धर्म डेस्क। न्यूजस्टिच
कान्हा की नगरी मथुरा में मंगलवार तड़के एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने भक्ति और शक्ति के संगम को जीवंत कर दिया। फालैन गांव में धधकती होलिका की 25 फीट ऊंची लपटों के बीच से ‘संजू पंडा’ नाम का शख्स सकुशल बाहर निकल आया। इस हैरतअंगेज चमत्कार को देखने के लिए देश-विदेश से आए 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु बांके-बिहारी के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान कर रहे थे।
भस्म नहीं कर पाई ‘अग्नि की ज्वाला’
मंगलवार सुबह करीब 4 बजे, जब होलिका की आग अपने चरम पर थी और लपटें आसमान छू रही थीं, तभी सिर पर गमछा और गले में रुद्राक्ष की माला पहने संजू पंडा वहां पहुंचे। हाथ में लाठी लिए खड़े ग्रामीणों के शोर और मंत्रोच्चार के बीच संजू पंडा ने धधकती आग में प्रवेश किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, संजू पंडा ने जलती आग के बीच रुककर अग्नि देवता को प्रणाम किया और कुछ ही सेकंड में लपटों को पार कर दूसरी तरफ निकल आए।

शरीर पर न खरोंच, न कोई जलन
आमतौर पर ऐसी भीषण आग के पास खड़ा होना भी नामुमकिन होता है, लेकिन संजू पंडा के शरीर पर जलने का एक भी निशान नहीं था। वे पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य नजर आ रहे थे। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह प्रह्लाद की भक्ति का प्रताप है। मान्यता है कि जो भी पंडा इस परंपरा को निभाता है, उस पर अग्नि देव की विशेष कृपा होती है।
50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु बने गवाह
इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश के विभिन्न कोनों और विदेशों से भी भारी संख्या में पर्यटक पहुंचे थे। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच इस परंपरा का निर्वहन किया गया। जिसने भी यह नजारा देखा, वह दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गया।

