पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने सख्त तेवरों से दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को क्षेत्र की शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए इसकी तुलना ‘कैंसर’ से की है। उन्होंने दावा किया कि जो काम पिछले 47 सालों में कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं कर पाया, वह उन्होंने कर दिखाया है।
“47 साल की नाकामी को हमने खत्म किया”
डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपतियों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई लोग कुछ करना चाहते थे, लेकिन उनमें साहस (Guts) की कमी थी। ट्रंप ने कहा:
“जब मैंने वह काम किया जिसे 47 वर्षों से किसी भी अन्य राष्ट्रपति को करना चाहिए था, तो आपने सुना होगा कि उनमें से कई ने कहा कि काश वे ऐसा कर पाते, लेकिन उनमें हिम्मत नहीं थी। हमारे पास कोई विकल्प नहीं था।”
ईरान को बताया ‘कैंसर’
पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के अपने विजन को साझा करते हुए ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा:
- कैंसर की उपमा: “अल्पकाल में हमें जो करना था, वह था इस कैंसर से छुटकारा पाना। हमें इस कैंसर को काटकर बाहर करना था। वह कैंसर ‘परमाणु हथियार से लैस ईरान’ था।”
- अगला कदम: ट्रंप ने आगे कहा, “हमने इसे काट दिया है। अब हम इसे पूरी तरह से खत्म (Finish off) करने जा रहे हैं।”
क्या हैं इस बयान के मायने?
ट्रंप का यह बयान स्पष्ट करता है कि अमेरिका की वर्तमान विदेश नीति ईरान के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है। 2026 के इस दौर में, जब इज़राइल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, ट्रंप की यह टिप्पणी संकेत देती है कि अमेरिका ईरान के परमाणु ठिकानों या उसकी सैन्य क्षमताओं के खिलाफ और भी बड़े कदम उठा सकता है।
वैश्विक राजनीति पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख न केवल पश्चिम एशिया के समीकरणों को बदलेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा। जहां एक ओर इज़राइल जैसे सहयोगी इस बयान का स्वागत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर खाड़ी देशों में चिंता की लहर है कि क्या यह सीधे महायुद्ध की ओर इशारा है।

