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बिहार के IGIMS में मुन्नाभाई वाला खेल! MBBS पेपर लीक के मेल से मचा हड़कंप, डीन के इस्तीफे के बाद निदेशक भी हुए गायब

बिहार के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में भ्रष्टाचार और पेपर लीक के आरोपों ने संस्थान की साख पर गहरा सवालिया निशान लगा दिया है। एक गुमनाम ईमेल के सामने आने के बाद एमबीबीएस (MBBS) और पीजी (PG) परीक्षाओं में धांधली की खबरों ने अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। आरोपों के केंद्र में संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार और डीन कार्यालय के कर्मचारी हैं।

संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार को बीते 11 मार्च को एक गुमनाम ईमेल प्राप्त हुआ था। इस मेल में डीन कार्यालय के एक कर्मी, हेमंत पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि पैसों के लेनदेन के जरिए परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र लीक कर दिए जाते हैं और परीक्षा से लेकर रिजल्ट तक पूरी ‘सेटिंग’ का खेल चलता है। सूत्रों की मानें तो इस पूरे सिंडिकेट में करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे होने का संदेह है।

हैरानी की बात यह है कि 11 मार्च को ही जानकारी मिलने के बावजूद निदेशक ने आरोपी कर्मी के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इस निष्क्रियता से नाराज होकर संस्थान के तत्कालीन डीन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। डीन के इस्तीफे और बढ़ते हंगामे को देखते हुए निदेशक डॉ. बिंदे कुमार अचानक छुट्टी पर चले गए हैं, जिससे उनकी भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

निदेशक की अनुपस्थिति में प्रभारी निदेशक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। हालांकि, इस कमेटी ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। कमेटी से मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य (Principal) को बाहर रखा गया है।

प्राचार्य ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि मेडिकल कॉलेज के सीधे अथॉरिटी प्राचार्य ही होते हैं, ऐसे में उन्हें जांच से बाहर रखना संदेह पैदा करता है। जानकारों का कहना है कि प्राचार्य को दूर रखना मामले की लीपापोती करने की कोशिश हो सकती है।

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