पूर्णिया होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन द्वारा आज शहर में 271वां विश्व होम्योपैथी दिवस अत्यंत उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। यह दिवस होम्योपैथी के जनक डॉ. सैमुअल हैनीमैन की जयंती के उपलक्ष्य में हर वर्ष 10 अप्रैल को पूरे विश्व में मनाया जाता है।
कार्यक्रम की शुरुआत और श्रद्धांजलि
समारोह की शुरुआत पूर्णिया होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन के सदस्यों द्वारा डॉ. हैनीमैन की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर और दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। इस अवसर पर उपस्थित चिकित्सकों ने केक काटकर एक-दूसरे को बधाई दी और होम्योपैथी के विकास का संकल्प लिया। कार्यक्रम की व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने में डॉ. खुर्शीद आलम, डॉ. जावेद, डॉ. कृष्णा एवम् डॉ. आर.एस. कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई और आगंतुक डॉक्टरों का गर्मजोशी से स्वागत किया।
होम्योपैथी: जटिल बीमारियों का प्रभावी समाधान
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. दीपक, डॉ. गौतम भट्टाचार्य, डॉ. कुंदन, डॉ. शेख अब्दुल कलाम आजाद, डॉ. रौनक हुसैन, डॉ. पुष्पराज कमल, डॉ. तौकीर अहमद और डॉ. जाकर अहमद ने होम्योपैथी की वर्तमान प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए।
वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में लोग इस चिकित्सा पद्धति की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि होम्योपैथी न केवल आम बीमारियों, बल्कि पुरानी और जटिल (क्रोनिक) बीमारियों का भी सफलतापूर्वक इलाज करने में सक्षम है, जिससे मरीज पूर्णतः स्वस्थ हो रहे हैं।
समरूपता के सिद्धांत पर आधारित उपचार
संस्था के सचिव डॉ. मनोज कुमार केशरी ने होम्योपैथी की वैज्ञानिकता को स्पष्ट करते हुए बताया:
होम्योपैथी एक ऐसी वैचारिक चिकित्सा पद्धति है जो समरूपता के सिद्धांत पर आधारित है। यह शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को सक्रिय कर रोगी का उपचार करती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दवाएं अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में दी जाती हैं, जो व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर समग्र उपचार (Holistic Healing) प्रदान करती हैं।
समापन और धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. शहनवाज आलम एवं डॉ. रविशंकर कुमार ने उपस्थित सभी चिकित्सकों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य में भी एसोसिएशन इसी तरह के जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से होम्योपैथी को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य करती रहेगी।

