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परीक्षा एक, एडमिट कार्ड 3! पूर्णिया विश्वविद्यालय ने तो गजब कर दिया, परीक्षा नहीं दे पाए हजारों छात्र

शिक्षा जगत में अक्सर पेपर लीक या परीक्षा में धांधली की खबरें आती हैं, लेकिन पूर्णिया से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शैक्षणिक व्यवस्था की गंभीरता पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। ‘सामर्थ्य’ पोर्टल की तकनीकी खामी और विश्वविद्यालय प्रशासन के तालमेल की कमी के कारण शनिवार को स्नातक प्रथम सेमेस्टर (Graduation 1st Year) के हजारों छात्र परीक्षा देने से वंचित रह गए। छात्रों का आरोप है कि देश के इतिहास में पहली बार एक ही परीक्षा के लिए तीन अलग-अलग एडमिट कार्ड जारी किए गए, जिसने भारी भ्रम पैदा कर दिया।

जानकारी के अनुसार, पूर्णिया विश्वविद्यालय के अंतर्गत स्नातक प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं 30 मार्च से शुरू होकर 15 अप्रैल तक निर्धारित थीं। परीक्षा प्रक्रिया शुरू होने से पहले दो एडमिट कार्ड जारी किए गए थे, जिनके आधार पर छात्रों ने 30 मार्च और 4 अप्रैल की परीक्षाएं शांतिपूर्वक दीं। लेकिन विवाद तब शुरू हुआ जब दो पेपरों के बाद विश्वविद्यालय की ओर से तीसरा एडमिट कार्ड जारी कर दिया गया।
छात्रों ने बताया कि इस तीसरे एडमिट कार्ड में परीक्षा की तिथियों में बदलाव कर दिया गया था। इसके अनुसार 8 और 10 अप्रैल को होने वाली परीक्षाओं की तारीखें बढ़ाकर क्रमशः 9 और 11 अप्रैल दिखाई गई थीं। हजारों छात्रों ने इसी नए एडमिट कार्ड पर भरोसा किया और शनिवार (11 अप्रैल) को परीक्षा देने केंद्र पहुंचे।

शनिवार सुबह जब बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आर.के.के. कॉलेज (R.K.K. College) स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचे, तो उन्हें सेंटर पर मौजूद अधिकारियों से यह सुनकर झटका लगा कि उनकी परीक्षा तो पुराने एडमिट कार्ड के आधार पर 10 अप्रैल को ही ली जा चुकी है। छात्र जसीम आलम और छात्रा इमराना खातून ने नाराजगी जताते हुए कहा, “जब विश्वविद्यालय ने नया एडमिट कार्ड जारी किया, तो पुराने आधार पर परीक्षा क्यों ली गई? यह हजारों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।”

जैसे ही छात्रों को परीक्षा छूटने का पता चला, उनका गुस्सा फूट पड़ा। छात्रों ने आर.के.के. कॉलेज के समीप मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया और यातायात ठप कर दिया। इसके बाद छात्र नेता पीयूष पुजारा और चाहत यादव के नेतृत्व में सैकड़ों छात्र हाथों में एडमिट कार्ड लेकर पूर्णिया विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन पहुंचे और घेराव किया।
छात्रों ने ‘सामर्थ्य पोर्टल’, विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का कहना था कि पोर्टल की तकनीकी गलती की सजा वे क्यों भुगतें? स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मधुबनी थाना की पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद छात्रों को शांत कराया।

बढ़ते हंगामे और छात्रों के आक्रोश को देखते हुए विश्वविद्यालय के अधिकारी हरकत में आए। परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर अमरकांत सिंह ने छात्रों के बीच आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने स्वीकार किया कि एडमिट कार्ड की त्रुटि के कारण बड़ी संख्या में छात्रों की परीक्षा छूटी है।
उन्होंने आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा:
“जिन छात्रों की परीक्षा इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण छूटी है, उनके लिए बहुत जल्द एक विशेष परीक्षा आयोजित की जाएगी। छात्र घबराएं नहीं, उन्हें दोबारा मौका मिलेगा। साथ ही, एहतियात के तौर पर आज के बाद की सभी निर्धारित परीक्षाओं को फिलहाल स्थगित किया जाता है। नया परीक्षा शेड्यूल जल्द ही विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा।”
आर.के.के. कॉलेज के प्राचार्य भोला प्रसाद यादव ने भी कहा कि वे विश्वविद्यालय प्रशासन के संपर्क में हैं और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी छात्र का साल बर्बाद न हो।

इस पूरी घटना ने बिहार के विश्वविद्यालयों में लागू किए जा रहे डिजिटल पोर्टल की कमियों को उजागर कर दिया है। ‘सामर्थ्य’ पोर्टल जैसी आधुनिक व्यवस्था का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाना था, लेकिन एडमिट कार्ड की इस गड़बड़ी ने इसे छात्रों के लिए मानसिक प्रताड़ना बना दिया। अब सबकी नजरें विश्वविद्यालय के नए शेड्यूल पर टिकी हैं।

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