दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ‘लाइफलाइन’ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में बढ़ते तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने फोन पर लंबी चर्चा की। इस बातचीत का केंद्र बिंदु खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही की सुरक्षा और अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमले रहे।
हॉर्मुज़ और समुद्री सुरक्षा पर ईरान का कड़ा रुख
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने एस. जयशंकर के साथ बातचीत में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। ईरान ने स्पष्ट किया:
- सुरक्षा के लिए अमेरिका जिम्मेदार: ईरान ने कहा कि फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में शिपिंग सुरक्षा के लिए जो अस्थिरता पैदा हुई है, वह अमेरिका की “अस्थिर करने वाली कार्रवाइयों” का परिणाम है।
- अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही: अराघची ने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका को इस स्थिति के लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए।
- नौवहन सुरक्षा: ईरान ने जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के अपने सैद्धांतिक दृष्टिकोण को दोहराया, लेकिन साथ ही अपनी अखंडता की रक्षा के लिए “दृढ़ संकल्प” भी जताया।
“11 दिनों के भीषण अपराध”: ईरान ने सुनाई आपबीती
अराघची ने पिछले 11 दिनों में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया:
- सिविलियन साइट्स पर हमला: युद्ध के पहले दिन मीनाब में लड़कियों के प्राथमिक स्कूल पर मिसाइल हमले से लेकर सार्वजनिक सेवा केंद्रों को निशाना बनाया जाना संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है।
- दुनिया से अपील: ईरान ने भारत समेत सभी देशों से इस “सैन्य आक्रामकता” और कानून तोड़ने की प्रवृत्ति की निंदा करने की अपील की।
भारत का रुख: स्थिरता और परामर्श पर जोर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तेहरान और नई दिल्ली के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के महत्व को दोहराया। भारत ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि समुद्र में जहाजों की सुरक्षा न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।
- परामर्श की आवश्यकता: जयशंकर ने क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए निरंतर बातचीत और परामर्श की आवश्यकता पर बल दिया।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ क्यों है अहम?
बता दें कि दुनिया का करीब 20% तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। अगर यहाँ सुरक्षा कारणों से जहाजों की आवाजाही रुकती है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जैसा कि हाल ही में एयर इंडिया द्वारा लगाए गए फ्यूल सरचार्ज के रूप में देखा भी जा रहा है।

