बिहार के कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लिए विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। पूर्णिया के बाद अब सुपौल जिले के बीरपुर में हवाई सेवाओं के विस्तार का रास्ता साफ हो गया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से यह जानकारी साझा की है कि सरकार ने बीरपुर हवाई अड्डे के कायाकल्प के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
36.38 करोड़ की लागत और 15 महीने का लक्ष्य
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अनुसार, एनडीए सरकार ने बीरपुर हवाई अड्डे के विकास और उन्नयन के लिए ₹36.38 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस परियोजना के लिए समय-सीमा भी तय कर दी गई है। निर्माण कार्य शुरू होने के 15 महीनों के भीतर इसे पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि क्षेत्र के लोगों को जल्द से जल्द हवाई सेवा का लाभ मिल सके।
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा टर्मिनल
यह केवल एक हवाई पट्टी नहीं, बल्कि एक पूर्ण विकसित एयरपोर्ट होगा। परियोजना के तहत यहाँ निम्नलिखित आधुनिक संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा:
आधुनिक टर्मिनल भवन: यात्रियों की सुविधा के लिए विश्वस्तरीय वेटिंग एरिया और चेक-इन काउंटर।
ATC टावर: विमानों के सुरक्षित संचालन के लिए अत्याधुनिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर।
फायर स्टेशन: सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए समर्पित अग्निशमन केंद्र।
सम्राट चौधरी ने अपनी पोस्ट में इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सतत प्रयासों को दिया है।
कोसी-सीमांचल का दूसरा बड़ा हवाई केंद्र
बीरपुर में हवाई सेवा शुरू होना सामरिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण है। पिछले साल पूर्णिया एयरपोर्ट से उड़ानें शुरू होने के बाद, यह कोसी-सीमांचल क्षेत्र का दूसरा एयरपोर्ट होगा। इससे न केवल सुपौल, बल्कि सहरसा, मधेपुरा और नेपाल सीमा से सटे इलाकों की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।
विकास और रोजगार के खुलेंगे द्वार
हवाई सेवा शुरू होने से बीरपुर और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, बुनियादी ढांचे के विकास से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। विशेषकर स्वास्थ्य आपातकाल और व्यापारिक यात्राओं के लिए अब यहाँ के लोगों को सिलीगुड़ी, दरभंगा या पटना पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

