Supriya Shrinate press conference on Kangana Ranaut's statement against Rahul Gandhi

भाजपा में गिरने की होड़…कंगना रनौत के ‘टपोरी’ बयान पर सुप्रिया श्रीनेत का पलटवार, कहा-उन्हें मनोचिकित्सक की जरूरत

भारतीय राजनीति में बयानों की मर्यादा का गिरता स्तर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। हाल ही में भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ इस्तेमाल किए गए टपोरी शब्द ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस बयान पर कांग्रेस की फायरब्रांड प्रवक्ता और सोशल मीडिया विभाग की अध्यक्ष सुप्रिया श्रीनेत ने मोर्चा संभालते हुए भाजपा और कंगना पर कड़ा प्रहार किया है।

सुप्रिया श्रीनेत ने कंगना रनौत के बयानों को केवल राजनीतिक हमला न मानकर इसे भाजपा की आंतरिक कार्यसंस्कृति से जोड़ दिया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के भीतर एक अजीबोगरीब होड़ चल रही है। भाजपा के अंदर यह कॉम्पिटिशन चल रहा है कि कौन अपनी भाषा में सबसे नीचे गिर सकता है? कौन सबसे घटिया टिप्पणी कर सकता है? कौन सबसे बेतुके बयान दे सकता है. कंगना अब इस रेस की लीडर बनने की कोशिश कर रही हैं. श्रीनेत ने आगे कहा कि कंगना के बयानों का स्तर अब बकवास की सीमा पार कर चुका है. उन्होंने सीधे तौर पर कंगना के मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें एक मनोचिकित्सक (Psychiatrist) की सख्त जरूरत है, क्योंकि उनकी हालत अब लाइलाज होती जा रही है.

विवाद तब शुरू हुआ जब हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद कंगना रनौत ने राहुल गांधी के लोकसभा में दिए गए भाषणों और उनके व्यवहार की आलोचना करते हुए उन्हें टपोरी कह दिया था. कंगना अक्सर राहुल गांधी और गांधी परिवार पर तीखे व्यक्तिगत हमले करती रही हैं, लेकिन इस बार टपोरी जैसे शब्द का चयन कांग्रेस को नागवार गुजरा.

इस पूरे प्रकरण के पीछे कई गहरे राजनीतिक आयाम छिपे हैं। सुप्रिया श्रीनेत का पलटवार यह दर्शाता है कि कांग्रेस अब भाजपा के व्यक्तिगत हमलों को उसी की भाषा में जवाब देने की रणनीति अपना रही है। मनोचिकित्सक की सलाह देना भी एक तरह का व्यक्तिगत प्रहार ही है, जो राजनीति के गिरते स्तर को दर्शाता है। नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद राहुल गांधी की छवि को लेकर कांग्रेस काफी रक्षात्मक और आक्रामक है। पार्टी उनके खिलाफ किसी भी अपमानजनक शब्द को बर्दाश्त नहीं करने का संदेश दे रही है।

कंगना रनौत के बयानों से अक्सर भाजपा को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। हालांकि वे पार्टी की सांसद हैं, लेकिन उनके बयानों से कभी-कभी मुख्य मुद्दों से ध्यान भटक जाता है, जिसका फायदा विपक्ष उठाता है। यह विवाद केवल दो महिला नेताओं के बीच की जुबानी जंग नहीं है, बल्कि यह 2026 की राजनीति के उस कड़वे सच को उजागर करता है जहां वैचारिक बहस की जगह व्यक्तिगत कीचड़ उछालने ने ले ली है। सुप्रिया श्रीनेत का बयान यह साफ करता है कि आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक शब्दों की यह जंग और तेज होने वाली है।

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