गैस संकट या सिर्फ अफवाह? पूर्णिया प्रशासन ने जारी किया स्टॉक का आंकड़ा, जानें क्यों लगी है एजेंसियों पर लंबी कतार

पिछले कुछ दिनों से पूर्णिया की सड़कों और गैस एजेंसियों के बाहर उमड़ रही भीड़ ने जिले में गैस किल्लत की अफवाहों को हवा दे दी थी। लेकिन अब जिला प्रशासन ने इस पर पूरी तरह विराम लगा दिया है। समाहरणालय स्थित प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान जिला आपूर्ति पदाधिकारी (DSO) रविशंकर उरांव ने साफ शब्दों में कहा कि जिले में गैस का पर्याप्त स्टॉक है। बस वितरण की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं।

अक्सर अफवाहें तब फैलती हैं जब जानकारी का अभाव होता है। DSO ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि जिले में रोजाना औसतन 3000 से 4000 सिलेंडरों की खपत होती है। इसके मुकाबले वर्तमान में जिले के पास 25182 सिलेंडरों का भारी-भरकम स्टॉक मौजूद है। कंपनियों के अनुसार स्टॉक की स्थिति कुछ इस प्रकार है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि जिले में ईंधन की कोई कमी नहीं है, बल्कि सप्लाई चेन पूरी तरह सुचारू है।

एजेंसियों पर दिख रही लंबी कतारों का कारण गैस की कमी नहीं, बल्कि e-KYC की अनिवार्य प्रक्रिया है। सरकारी निर्देशानुसार जिन उपभोक्ताओं का मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं है या डेटा अपडेट नहीं है, उनके कनेक्शन ‘इन-एक्टिव’ (निष्क्रिय) कर दिए गए हैं। अब बिना डिजिटल वेरिफिकेशन के गैस वितरण बंद है। इसी आधार अपडेट और केवाईसी की प्रक्रिया के कारण उपभोक्ताओं को एजेंसियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

जिलाधिकारी (DM) अंशुल कुमार ने इस स्थिति से निपटने के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा चक्र तैयार किया है। कालाबाजारी और डिलीवरी में देरी की शिकायतों के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम एक्टिव कर दिया गया है। पिछले 48 घंटों में मिली 27 शिकायतों का ऑन-द-स्पॉट समाधान किया गया। सप्लाई को और तेज करने के लिए मरंगा और मीरगंज (धमदाहा) स्थित रिफिलिंग प्लांट्स को सप्ताह के सातों दिन चालू रखने का आदेश दिया गया है। स्कूल और अस्पतालों जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस मिलेगी, ताकि जनसेवा बाधित न हो। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर गैस की होर्डिंग (जमाखोरी) न करें। अपनी बारी आने पर शांतिपूर्वक e-KYC कराएं और किसी भी शिकायत के लिए सीधे जिला कंट्रोल रूम से संपर्क करें।

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