राज्यसभा चुनाव में ‘बगावत’ या ‘आत्मसम्मान’? फारबिसगंज विधायक ने तोड़ी चुप्पी, कहा-न बिका हूं, न पार्टी बदली है

बिहार की सियासत में 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस चुनाव के बाद सबसे ज्यादा चर्चा फारबिसगंज विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक की हो रही है। उन पर क्रॉस वोटिंग या पार्टी लाइन से हटकर निर्णय लेने के गंभीर आरोप लग रहे थे। अब इन तमाम अटकलों और जनता के बीच उपजी नाराजगी को देखते हुए विधायक ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और एक बेहद भावुक स्पष्टीकरण जारी किया है।

सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए विधायक ने स्पष्ट किया कि उन्होंने राज्यसभा चुनाव में किसी भी पार्टी के पक्ष में मतदान नहीं किया है। उन्होंने विरोधियों द्वारा फैलाए जा रहे ‘पैसे के लेन-देन’ और ‘पार्टी बदलने’ के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। विधायक ने कहा कि मैंने जो भी फैसला लिया, वह अपने क्षेत्र की जनता के आत्मसम्मान और विकास को ध्यान में रखकर लिया है। मैं आज भी कांग्रेस में हूं और आगे भी रहूंगा।

16 मार्च को राज्यसभा की खाली सीटों के लिए मतदान हुआ था। बिहार में संख्या बल के हिसाब से मुकाबला कड़ा था। कांग्रेस ने अपने विधायकों के लिए ‘व्हिप’ जारी किया था। चर्चा तब शुरू हुई जब मतदान के दौरान फारबिसगंज विधायक नहीं पहुंच थे। राजनीतिक गलियारों में खबर उड़ी कि जानबूझकर अनुपस्थित रहे हैं। इसके बाद कांग्रेस खेमे में हड़कंप मच गया। पार्टी आलाकमान ने उनसे जवाब तलब करने की तैयारी शुरू कर दी।

विधायक के इस कदम का असर केवल पार्टी के अंदरूनी समीकरणों पर ही नहीं, बल्कि राज्यसभा के नतीजों पर भी पड़ा। विपक्षी खेमे के एक उम्मीदवार की हार या जीत का अंतर इन्हीं कुछ वोटों पर टिका था। इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए जांच कमेटी गठित करने के संकेत दिए हैं। फारबिसगंज के कार्यकर्ताओं और वोटरों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई, जिसे दूर करने के लिए विधायक को अब सफाई देनी पड़ रही है। जानकारों का मानना है कि भले ही विधायक कांग्रेस में रहने का दावा कर रहे हों, लेकिन इस ‘स्वतंत्र स्टैंड’ के बाद उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरियां बढ़ गई हैं, जिसका असर आगामी विधानसभा चुनावों में टिकट वितरण पर पड़ सकता है।

विधायक ने अपने संदेश के अंत में फारबिसगंज की जनता को अपना परिवार बताते हुए भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि उनका विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और वे इस भरोसे को कभी टूटने नहीं देंगे। फिलहाल, विधायक की इस सफाई ने समर्थकों को तो शांत कर दिया है, लेकिन बिहार की राजनीति के माहिर खिलाड़ी अब भी उनके अगले कदम पर नजरें गड़ाए हुए हैं।

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